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DSP अयूब पंडित की हत्या पर गुस्साया परिवार ?

ayub family

श्रीनगर। शहीद पुलिस उपाधीक्षक (DSP) मोहम्मद अयूब पंडित की हत्या मामले में उनके परिवारिक सदस्यों और दोस्तों में जबर्दस्त ग़ुस्सा और अविश्वास है। अयूब की भाभी ने कहा है कि हम किस मुकाम पर आ गए हैं कि एक पवित्र रात को हम एक मस्जिद के बाहर एक शख्स को बेवजह मार डालते हैं। क्या मजहब ने हमें यही सिखाया है ? सूत्रों के मुताबिक अयूब को पहले भीड़ ने पकड़ लिया था और उनके कपड़े फाड़ दिए। बाद में वहां मौजूद 200 से 300 लोगों की भीड़ ने पत्थर मार-मारकर उनकी हत्या कर डाली। पंडित नौहट्टा के पास खानयार इलाके के रहने वाले थे। अयूब पंडित का पैतृक गाँव नोपोरा में था। वहां उनका परिवार व्यवसाय करता है। उनके परिवार में दो भाइयों के साथ तीन बहनें भी हैं।





उन्होंने एक बेकसूर तहजुद गुज़र को मार डाला

दरअसल, शहीद पुलिस अधिकारी की भाभी ने उनके गृह नगर नोपोरा में पत्रकारों से बातचीत करते हुए ये बातें कहीं। उन्होंने कहा कि ‘क्या हम इसी आजादी के लिए लड़ रहे हैं कि हमने लोगों को मार डालना शुरू कर दिया है।’ उन्हें किसी चरमपंथी या सेना के जवान ने नहीं मारा, उन्हें एक भीड़ ने मारा डाला। उन्होंने एक बेकसूर तहजुद गुज़र (रात में प्रार्थना करने वाले) को मारा।’

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अयूब पंडित को श्रद्धांजलि देने पहुँचीं जम्मू कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती

बता दें कि श्रीनगर की जामिया मस्ज़िद के बाहर सुरक्षा में तैनात पुलिस अधिकारी मोहम्मद अयूब पंडित की गुरुवार को भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी। यह इस्लाम में पवित्र मानी गई रात शब-ए-क़द्र का मौक़ा था। शुक्रवार को उन्हें सुपुर्द-ए-खाक किया गया। इस मौके पर पुलिस के आला अफसर और सीएम महबूबा मुफ्ती के अलावा कई मंत्री मौजूद रहे।

इसलिए नहीं पहनी थी वर्दी

पंडित ने अपने करियर की शुरूआत 1990 में एक सब-इंस्पेक्टर के रूप में की थी। वह फिलहाल जम्मू-कश्मीर पुलिस के सुरक्षा विंग में डीएसपी के पद पर तैनात थे और कुछ दिन पहले ही उन्हें मस्जिद पर तैनात किया गया था। इस क्षेत्र में आने वाले कई स्थानीय लोग उन्हें जानते थे। सुरक्षा विंग में पोस्ट किए गए पुलिसकर्मी सर्विस रेगुलेशन के कारण वर्दी नहीं पहनते हैं। जांच रिपोर्ट के मुताबिक पंडित के गार्ड भीड़ को देख उन्हें अकेला छोड़कर भाग निकले थे। गुरुवार शाम को उन्हें फोन कर जामिया मस्जिद जाने के लिए कहा गया था।

बहुत ही साधारण थे अयूब, खुद ही पोलिश करते थे अपने जूते

शहीद अफसर अयूब के दोस्त और पड़ोसियों ने बताया कि अयूब बहुत ही ईमानदार और जमीन से जुड़े हुए व्यक्ति थे। उनके ऊपर उनकी बीवी और दो बच्चों की जिम्मेदारी थी। अयूब की भाभी ने बताया कि पंडित बहुत ही ईमानदार व्यक्ति थे, पुलिस अफसर होने का उन्हें कोई गुमान नहीं था। यहां तक कि वे अपने जूते भी खुद ही पॉलिश करते थे। कश्मीर में हाई कोर्ट बार एसोसिएशन के सदस्य और उनके भतीजे ने बताया कि मोहम्मद अयूब पंडित की बेटी बांग्लादेश में एमबीबीएस की पढ़ाई कर रही हैं, जबकि उनका बेटा 12वीं की परीक्षा के बाद से बीमार चल रहा है।

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शहीद अफसर महोम्मद अयूब के पार्थिव शरीर को उनके घर ले जाया गया

पुलिस के सब्र का इम्तिहान न लें : महबूबा मुफ़्ती

मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा- “जम्मू-कश्मीर की जो पुलिस है, ये पूरे मुल्क में सबसे बेहतर है। ये बहुत ही ज्यादा बहादुर है। ये बहुत ही ज्यादा हिम्मत वाले हैं। जम्मू-कश्मीर में अपने लोगों के साथ डील करते वक्त वे सब्र रख रहे हैं, जिस दिन इनके सब्र का पैमाना टूटेगा, मैं समझती हूं कि उस दिन बहुत मुश्किल होगी। कहीं फिर से वही वक्त ना लौट आए जब पुलिस की गाड़ी देखते ही लोगों को भागना पड़ता था।”

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