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तीन साल पहले ‘मारे’ गए 15 लाख के इनामी ने किया सरेंडर

रांची। तीन साल पहले जिस दुर्दांत माओवादी कुंदन पाहन के पुलिस मुठभेड़ में मारे जाने की खबरें सुर्खियां बनी थीं, उसी कुंदन पाहन ने रांची पुलिस के सामने सरेंडर कर दिया है। 15 लाख के इनामी कुंदन पर हत्या, लूट और डकैती समेत तकरीबन सौ मामले दर्ज हैं।





माओवादी कुंदन (काले कपड़े में बाईं तरफ) को उस पर रखी इनामी राशि के चेक सौंपा गया

23 जुलाई वर्ष 2014 को खबरें आर्इं थीं कि सीपीआई (माओवादी) के उप-क्षेत्रीय जोनल कमांडर और संगठन के शीर्ष माओवादी कुंदन को खूँटी जिले के जंगलों में सुरक्षा बलों के साथ हुई मुठभेड़ में मारा गया। उस समय जो खबरें छपी थीं उनके मुताबिक़ खुफिया सूचना मिलने के बाद राज्य पुलिस और सीआरपीएफ की कोबरा कमांडो के 25 सैनिकों ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया। इस अभियान में रांची के पुलिस अधीक्षक एसके झा के नेतृत्व में एएसपी (आपरेशन), पीआर मिश्रा एएसपी (आपरेशन) रांची, कोबरा इकाई के डिप्टी कमांडेंट हर्षपाल सिंह और कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए थे। उस समय मुठभेड़ के दौरान कोबरा के असिस्टेंट कमांडेंट मनोज कुमार यादव को आँख के पास गोलियों के छर्रे लगे थे। इस सफलता पर उस समय कार्यवाहक मुख्य सचिव सजल चक्रवर्ती और पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार द्वारा रांची के SP (ग्रामीण) एसके झा को बधाई देते हुए तस्वीरें भी छपी थीं।

ऐसे बना था कुख्यात माओवादी

एक के बाद एक नई घटनाओं को अंजाम देने वाला कुंदन एक साधारण किसान था। उसके परिवार के पास तकरीबन 1600 एकड़ पैतृक भूमि थी जिसमें उसके परिवार का 500 एकड़ हिस्सा था और उसके पिता के हिस्से में 100 एकड़ भूमि आई जिससे उसके एक रिश्तेदार द्वारा बेदखल किए जाने पर विवाद शुरू हो गया।

माओवादी कुंदन पाहन की पुरानी तस्वीर (पुलिस रिकॉर्ड के मुताबिक)

इस विवाद के बाद में उसका परिवार बुंडू के बारूहातू में पलायन कर गया। यहां 1919 में एक नक्सली मीटिंग हुई जिसमें कुंदन को उसके हिस्से की जमीन दिलाने का आश्वासन दिया गया। इस आश्वासन के साथ ही अपने छह भाइयों में सबसे छोटा कुंदन एमसीसीआई में शामिल हो गया और वह जल्दी ही जोन में इतना सक्रिय हो गया कि वह भाकपा (माओवादी) का जोनल कमांडर बन गया।

बीमारी ने मजबूर किया आत्मसर्मपण के लिए

कुंदन की 30 जून 2008 को भी पुलिस के साथ मुठभेड़ हुई थी, जिसमें वह बच निकला था, लेकिन अपनी सक्रिय अवधि के दौरान कुंदन ने करीब सौ से भी ज्यादा लोगों को मौत के घाट उतार दिया था। कुंदन का वास्तविक नाम विकास है। बताया जा रहा है कि वह काफी समय से बीमार चल रहा था, जिसके कारण उसने आत्मसर्मपण का मन बनाया। इन दिनों वह इलाज के सिलसिले में राउरकेला में शरण लिए हुए था जबकि उसके बच्चे बोकारो में रहते हैं। पुलिस के दौरान कुंदन ने 70 मामलों में शामिल होने की पुष्टि की है।

पूर्वमंत्री रमेश सिंह मुंडा को स्कूल परिसर में मार डाला था

वर्ष 2008 में कुंदन के नाम की चर्चा उस समय हुई थी जब तत्कालीन डीएसपी प्रमोद कुमार सहित छह पुलिसकर्मियों को रांची टाटा रोड पर तमाड़ घाटी में लैंड माइंस ब्लास्ट में उड़ा दिया गया था। इस घटना के आठ दिन बाद कुंदन ने बुंडू में पूर्वमंत्री रमेश सिंह मुंडा की एक स्कूल परिसर में हत्या कर दी थी। 6 अक्टूबर 2009 को अड़की थाना क्षेत्र में एक सब्जी बाजार में स्पेशल पुलिस इंस्पेक्टर फ्रांसिस इंदवार का सिर काट डाला। वर्ष 2008 में चौका थाना क्षेत्र में तीन पुलिसकर्मियों की राइफलें लूटीं।

इसी वर्ष जमशेदपुर रांची मार्ग पर आईसीआईसीआई बैंक की कैशवैन से पांच करोड़ लूटकर आग लगा दी और एक किलो सोना लूटा। इसी वर्ष संगठन के निर्देश पर जंगल में बीड़ी पत्ता व लकड़ी लदे ट्रक को आग लगा दी।

करवा दिया था जिगरी दोस्त का सिर कलम

इस सरेंडर के साथ ही कुंदन पाहन के कई खौफनाक किस्से लोगों के जेहन में आ जाते हैं। जिनमें से उसका अपने जिगरी दोस्त ज्योति मुंडा का सिर कलम करना भी है। बताया जाता है कि कुंदन ने पूरे दस्ते के सामने पहले उसके दोनों हाथ काटे फिर उसका सिर कलम करवा दिया। दरअसल बुंडू पुलिस ने ज्योति को अपना मुखबिर बना लिया था जिससे कुंदन की गतिविधियां पुलिस तक पहुंचने लगीं। दोस्त की ये हरकत जानकर उसने अपने ही दोस्त को मौत के घाट उतार दिया।

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