Police

थाने में नहीं पब्लिक के बीच होगी ‘दरोगा जी’ की मीटिंग

ब्रीफिंग करते एसएचओ

नई दिल्ली। दिल्ली पुलिस में ऐसा नजारा पहली बार देखने को मिल रहा है कि एसएचओ थाने की चारदीवारी से बाहर निकलकर पब्लिक के बीच में बीट स्टाफ की ब्रीफिंग करेंगे। सीनियर पुलिस अधिकारियों के मुताबिक इलाके में रहने वाले किसी व्यक्ति को कोई परेशानी है तो वह ब्रीफिंग के दौरान ही SHO से मिलकर अपनी परेशानी बता सकता है। यही नहीं सुबह और शाम के वक्त होने वाली ब्रीफिंग अलग-अलग जगहों पर होगी।





आपराधिक घटनओं पर अंकुश लगाने के मद्देनजर SHO सुबह और शाम दो बार अपने बीट स्टाफ की ब्रीफिंग करते हैं। ब्रीफिंग के वक्त SHO अपने बीट स्टाफ को हमेशा अलर्ट रहने की हिदायत देते हैं। साथ ही स्टाफ को अपने क्षेत्र में रहने वाले घोषित अपराधियों के साथ-साथ जेल से छूटने वाले क्रिमिनल्स पर भी नजर रखनी होती है। उन्हें अपने क्षेत्र में अपने इलाके में होने वाले संगठित अपराध को लेकर भी अलर्ट रहना होता है। यदि किसी बीट में लगातार वारदात हो रही होती है तो SHO उस बीट के स्टाफ से यह पूछते हैं कि आखिर इन वारदातों पर रोकथाम क्यों नहीं लग पा रही है।

ब्रीफिंग सिस्टम में बदलाव करते हुए ब्रीफिंग को क्षेत्र में नागरिको के बीच शुरू किया गया है। इसकी शुरुआत दिल्ली ईस्ट डिस्ट्रिक्ट ने की है। जिले के सभी 10 पुलिस थानों के एसएचओ को चारदीवारी से बाहर इलाके में ब्रीफिंग करने के लिए कहा गया है। आमतौर पर हर थाने में सुबह 9 बजे और शाम 6 बजे के आसपास प्रत्येक एसएचओ बीट स्टाफ की ब्रीफिंग लेते हैं। जब से यह नई व्यवस्था शुरू हुई है तब से हर थाने का एसएचओ सुबह ही अपने बीट स्टाफ को यह मेसेज दे देते है कि आज ब्रीफिंग बीट नंबर- 1 में किसी पार्क या मार्केट में होगी। समय पर सभी बीट अधिकारी, डिवीजन ऑफिसर और संबंधित थाने के SHO के अलावा अडिशनल एसएचओ और इंस्पेक्टर इन्वेस्टिगेशन उस प्वाइंट पर पहुंचते हैं।

नई व्यवस्था SHO को भी सही लग रही है। ब्रीफिंग की नई व्यवस्था पर फीडबैक के लिए ईस्ट डिस्ट्रिक्ट के एक एसएचओ से बात की गई तो उन्होंने बताया कि अभी तक एसएचओ थाने के अंदर बिना यूनिफॉर्म के भी स्टाफ की ब्रीफिंग ले लेते थे, लेकिन अब उन्हें भी वर्दी पहनकर तैयार होकर संबंधित प्वाइंट पर पहुंचना होता है।

रक्षक न्यूज की राय:

थाने की चारदीवारी से बाहर किसी पार्क या मार्केट या कहीं अन्य स्थल पर आम आदमी के बीच बीट स्टाफ की मीटिंग से नागरिकों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और अपराधियों के हौसले पस्त होंगे। इस व्यवस्था को पूरी दिल्ली में लगातार करना होगा और लोगों को भी अपनी जिम्मेदारियों के तहत दिल्ली पुलिस की मदद करने के लिए कमर कसनी होगी ताकि क्राइम कम हो सके।

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