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गोपनीय सैनिकों की पहचान खतरे में, जानिए क्यों ?

जगदलपुर/बस्तर: छत्तीसगढ़ के अति माओवाद ग्रस्त जिलों में से एक बस्तर में अब गोपनीय सैनिक की पहचान खतरे में पड़ती नजर आ रही है। जिले में अब तक करीब 50 गोपनीय सैनिकों की भर्ती की जा चुकी है और इन्हें आरक्षक भी बनाया गया है। अभी और नए गोपनीय सैनिकों की भी नियुक्ति की जा रही है। ये सैनिक विभिन्न इलाकों में पहुंचकर आसपास की गतिविधियों की बारीकी से जानकारी हासिल कर पुलिस अधिकारियों को इसकी रिपोर्ट सौंपते हैं और उनसे मिली सूचना के आधार पर पुलिस आगे की रणनीति तय करती है।





अब इन गोपनीय सैनिकों की पहचान लगातार सोशल मीडिया पर उजागर होती जा रही है, जिससे उनकी गोपनीयता भंग होने से पुलिस को माओवाद विरोधी अभियानों में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। मुख्य रूप से माओवादियों की गतिविधियों सहित शहरी नेटवर्क की जानकारी पुलिस तक पहुंचाये जाने में यह गोपनीय सैनिक बड़ी भूमिका निभाते हैं।

गोपनीय सैनिकों को मानदेय के रुप में राशि भी प्रदान की जाती है। शहर में कई युवाओं को पुलिस में बतौर गोपनीय सैनिक भर्ती किया गया। पर ये गोपनीय सैनिक अपनी गोपनीयता को बनाये रखने में कामयाब नहीं हो पा रहे हैं। सोशल मीडिया पर गोपनीय सैनिकों की भर्ती से लेकर उनके सूचना संकलन करने के तरीकों की तस्वीरें वायरल होती जा रही हैं। ऐसे में पुलिस की गतिविधियों की जानकारी सार्वजनिक हो जाती है, जिससे अभियानों में विपरीत प्रभाव पड़ने का खतरा बढ़ जाता है।

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