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छत्तीसगढ़ पुलिस का मानवीय चेहरा, आत्मसमर्पण करने वाली नक्सली का विवाह कराया

नक्सली रेशमा

रायपुर। छत्तीसगढ़ पुलिस की इस बात के लिए प्रशंसा की जानी चाहिए कि उसने आत्मसमर्पण करने वाली एक नाबालिग का न सिर्फ पालन-पोषण किया बल्कि उसके हाथ भी पीले किए। खबरों के अनुसार नक्सल प्रभावित राजनांदगांव जिले में तीन वर्ष पहले वर्ष 2014 में एक नाबालिग नक्सली सावित्री विश्वकर्मा उर्फ रेशमा ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया था। रेशमा को नक्सली उसके गांव तमोड़ा से अपने साथ ले गए थे। उस वक्त रेशमा की उम्र 13 वर्ष थी। नक्सलियों ने रेशमा को भी नक्सली बना दिया। नक्सलियों के लिए वह काम भी करने लगी लेकिन जब-तब के खून-खराबे और नक्सलियों के व्यवहार से तंग आकर रेशमा ने वर्ष 2014 में राजनांदगांव पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया। नक्सलियों ने रेशमा के पिता की हत्या कर दी।





इन स्थितियों में पुलिस ने रेशमा के पालन-पोषण का जिम्मा उठाया और उसकी पढ़ाई-लिखाई का भी इंतजाम किया। रेशमा की सहायता हथियार डालने वाले अन्य नक्सलियों ने भी की। पुनर्वास नीति के तहत रेशमा को डेढ़ लाख रुपये की आर्थिक सहायता भी दी गई। बालिग होने पर पुलिस ने रेशमा का विवाह समाज के ही एक युवक से करा दिया गया। इतना ही नहीं पुलिस ने रेशमा के पति को राजनांदगांव स्थित पुलिस पेट्रोल पंप में नौकरी भी दी।

 

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