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‘आतंकी’ से इंस्पेक्टर बने ‘कमांडो’ से छिना वीरता पदक

गुरमीत सिंह पिंकी

चंडीगढ़। केंद्र सरकार ने हाल ही में एक अनूठे अधिनियम के तहत पूर्व पुलिस कैट कमांडो पुलिस इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह पिंकी से वीरता पदक वापस लेने का फैसला किया है। गुरमीत सिंह को हत्या के एक मामले में दोषी पाया गया है। इंस्पेक्टर गुरमीत सिंह को पंजाब के पूर्व मुख्यमंत्री बेअंत सिंह के हत्यारे जगतार सिंह हवारा को पकड़ने के पुरस्कार स्वरूप राज्य सरकार के प्रस्ताव पर 1997 में केंद्र सरकार द्वारा वीरता पदक दिया गया था। पंजाब में उग्रवाद के दौरान वह पुलिस में भर्ती हुआ था। पुलिस में भर्ती होने से पहले पिंकी कथित रूप से आतंकवादी गिरोह बब्बर खालसा का सदस्य था।





1988 में कांस्टेबल से बनाया गया था पुलिस ‘CAT’ (कमांडो)

गुरमीत सिंह पिंकी

गुरमीत सिंह पिंकी

1987 में पंजाब में उग्रवाद के दौरान आतंकवादी गिरोह से संबंध रखने वाले मोहाली निवासी पिंकी को 1988 में एक कांस्टेबल के रूप में भर्ती कराया गया था। एनकाउंटर स्पेशलिस्ट के तौर पर उभरने के बाद में वह पुलिस कैट बना। पुलिस ने उसकी मदद से दर्जनों एनकाउंटर किए, जिनके लिए राज्य सरकार ने पिंकी को वीरता पदक देने की सिफारिश की थी।

2001 में लुधियाना में उसने एक युवक की हत्या की थी। अपराध साबित होने पर 2006 में उसे उम्रकैद हुई और नौकरी से निकाल दिया गया, लेकिन तत्कालीन सरकार ने सात साल में ही सजा माफ करा दी और 2014 को वह रिहा हो गया। इसके बाद उसे इंस्पेक्टर के रूप में नियुक्त किया गया।

सात जून को राष्ट्रपति ने वीरता पदक वापस लेने की मंजूरी दी

केंद्रीय गृह मंत्रालय को जुलाई 2015 में पिंकी पर लगे आरोपों के बारे में पता चला और जल्द ही यह मामला पंजाब सरकार के समक्ष रखा गया, जिसने पिंकी पर लगे अपराधों की पुष्टि की और मंत्रालय से पदक वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करने की सलाह दी। खुफिया एजेंसियों की रिपोर्ट के बाद राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी को पिंकी को दिए गए वीरता पदक को वापस लेने के लिए एक प्रस्ताव भेजा गया। गृह मंत्रालय से जुड़े सूत्रों के अनुसार राष्ट्रपति ने 7 जून को पिंकी से पुलिस वीरता पदक वापस लेने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है।

गुरमीत सिंह पिंकी

गुरमीत सिंह पिंकी (फाइल फोटो)

गृह मंत्रालय द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, जब अदालत द्वारा किसी वीरता पुरस्कार प्राप्त सम्मानित व्यक्ति को किसी ऐसे आचरण के लिए दोषी ठहराया जाता है, जिसमें नैतिक भ्रष्टाचार शामिल हो, जो पुलिस बल को किसी भी रूप में बदनाम करता हो, ऐसी स्थिति में उसे एक एक्ट के तहत खारिज कर दिया जाता है।

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