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अंगदान में अभी लंबा रास्ता तय करना हैः BSF महानिदेशक

के के शर्मा
के के शर्मा (फाइल फोटो)

नई दिल्ली। भारत की पहली रक्षा पंक्ति में तैनात सीमा सुरक्षा बल (BSF) भारत-पाक तथा भारत-बांग्लादेश सीमाओं की अभेद्य सुरक्षा कर रहा है। इसके साथ ही यह अन्य सामाजिक कार्यों में भी लगातार अपना योगदान देता रहता है। इसी क्रम में सीमा सुरक्षा बल ने गत 11 अगस्त 2018 को बल मुख्यालय परिसर में ’विश्व अंगदान दिवस’ पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया।





इस अवसर पर बल के महानिदेशक के.के. शर्मा ने कहा कि शारीरिक अंगों की मांग दुनिया भर में बहुत अधिक है। जिसके कारण कितने ही रोगी निवारण रोग होने के बावजूद अंगों के अभाव में अपना दम तोड़ रहे हैं। मांग और आपूर्ति के बीच के इस अंतर को खत्म करने के लिए हमें अभी लंबा रास्ता तय करना है।

वहीं इस संदर्भ में सीमा सुरक्षा बल देश की सीमाओं की जिम्मेदारी निभाने के साथ-साथ अपने सामाजिक दायित्वों को भी नहीं भूला है। बल द्वारा समय-समय पर अपनी तैनाती वाले सीमावर्ती इलाकों में ब्लड डोनेशन कैंप, नि:शुल्क चिकित्सा शिविर, नि:शुल्क दवाई वितरण आदि चिकित्सकीय कार्य किये जाते रहे हैं। वहीं National Organ and Tissue Transplant Organization (Notto)  संस्था में अंगदानार्थ पंजीकृत बल कार्मिकों की अगर बात की जाए तो उनकी संख्या लगातार बढ़ रही है।

उन्होंने बताया कि शारीरिक रूप से असक्षम लोगों के अंधेरे जीवन में रोशनी की अलख जलाने वाला यह कार्य निश्चित ही मन को खुशी देने वाला है। जिससे प्रेरित होकर मैं और मेरा परिवार पहले ही इस मुहिम से जुड़कर अंगदान का प्रण ले चुके हैं।

वर्ष 2016 में भी ’ विश्व अंगदान दिवस’ पर बहुत कम समय के नोटिस पर सीमा सुरक्षा बल परिवार के सदस्यों ने स्वेच्छा से ग्यारह हजार शपथ पत्र अंगदान के लिये समर्पित किये थे।

 

 

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