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हापुड़ के शहीद जवान की आखिरी होली, घर से लौटने के 2 दिन बाद हुए शहीद

शहीद शोभित शर्मा का पार्थिव शरीर
शहीद शोभित शर्मा का पार्थिव शरीर

नई दिल्ली। रक्तरंजित मंगलवार सीआरपीएफ जवानों के लिए उस वक्त दर्द भरा मंजर लेकर आया जब वे सुकमा के लिए जा रहे थे। सुकमा जहां नक्सलियों का गढ़ बन चुका है वहीं जवानों के लिए चिंता का सबब, लेकिन सीआरपीएफ के जवान भी हर वारदात के बाद नक्सलियों के किले को ढाने के लिए आगे बढ़ते रहते हैं। सुकमा में शहीद हुए 09 जवानों में शामिल हापुड़ के शोभित दो दिन पहले ही होली की छुट्टी मनाने के बाद छत्तीसगढ़ लौटे थे।





छत्तीसगढ़ के सीआरपीएफ कंट्रोल रूम से ज्यों ही शहीद के परिवार को दुखद सूचना का पता लगा, वहां मानों कोहराम मच गया। धीरे-धीरे यह खबर आग की तरह फैल गई और शहीद के घर सांत्वना देने वालों का जमावड़ा लगना शुरू हो गया।

गांव मुदाफरा निवासी राधेश्याम शर्मा काफी समय पहले मेरठ रोड स्थित शांति विहार कॉलोनी में रहने आ गए थे। वह प्रधानाध्यापक पद से सेवानिवृत्त थे और करीब दो साल पहले उनका निधन हो चुका है। राधेश्याम शर्मा के चार पुत्रों में से तीसरे नंबर के शोभित करीब 14 साल पहले सीआरपीएफ में बतौर कांस्टेबल तैनात हुए थे। वर्तमान में छत्तीसगढ़ के सुकमा में उनकी तैनाती थी।

शोभित 18 फरवरी को होली की छुट्टी लेकर घर आए थे। शहीद के छोटे भाई संदीप ने एक अखबार को बताया कि दो दिन पहले उनकी छुट्टी समाप्त हो चुकी थी और परिवार के लोग उन्हें रेलवे स्टेशन पर छोड़ने गए थे। मंगलवार को ही वे छत्तीसगढ़ पहुंचे थे और वहां से सरकारी गाड़ी में सुकमा के लिए जा रहे थे।

भाई ने बताया कि मंगलवार की दोपहर करीब साढ़े तीन बजे वहां के कंट्रोल रूम से उनकी भाभी के फोन पर कॉल आई जिसमें बताया गया कि शोभित शहीद हो गए हैं।

शहीद शोभित का आठ वर्ष का इकलौता पुत्र कृष्णा नगर के मिशन स्कूल में कक्षा तीन का छात्र है और इस दर्दनाक खबर मिलने के बाद से वह काफी गुमसुम हो गया है। शहीद की पत्नी ज्योति के भी आंसू रुकने के नाम नहीं ले रहे हैं। घर में विधवा मां रतनेश देवी का रो-रोकर बुरा हाल है।

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