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वाघा बॉर्डर की तर्ज पर यहां भी होगी ‘बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी’, BSF ने उठाया बड़ा कदम

दिलों को जोड़ने और रिश्तों में घुली नफरत की कड़वाहट को मिटाने के लिए दोनों ही देश कुछ बेहतर भी करते रहते हैं और इसकी एक बानगी वाघा बॉर्डर पर होने वाली ‘बीटिंग द रिट्रीट’ है। इसी भव्य  समारोह की तर्ज पर BSF आने वाले कुछ समय में जम्मू-कश्मीर के उस इलाके में जहां से आजादी से पूर्व पाकिस्तान के सियालकोट के लिए सड़क जाती थी  उसी के नजदीक और भारतीय सीमा के भीतर ऑक्ट्राय में बीएसएफ भव्य ‘बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी’ शुरू करने जा रहा है।





जम्मू-कश्मीर टूरिज्म को मिलेगा बढ़ावा 

इस नए फैसले के पीछे राज्य व केंद्र सरकार की मंशा है कि इस आयोजन से ऑक्ट्राय में लोगों की मौजूदगी बढ़ने से जम्मू-कश्मीर टूरिज्म को बढ़ावा तो मिलेगा ही। वहीं, दोनों देशों के रिश्ते भी बेहतर होंगे। बता दें कि छोटे स्तर पर दोनों देशों की तरफ से अभी भी की जाती है। लेकिन अब इसे वाघा बॉर्डर पर होने वाली ‘बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी’ की तर्ज पर भव्य बनाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं। जानकारी के मुताबिक BSF जम्मू-कश्मीर के इस इलाके में जल्द ही भव्य सेरेमनी को आरंभ कर देगा। इससे इस इलाके में वाघा बॉर्डर की तर्ज पर ही बड़ी संख्या में लोग यहां पहुंचेंगे।

ऐसे होती है बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी

वाघा बॉर्डर की सेरेमनी की बात करें तो ‘बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी’ की शुरुआत 1959 में हुई। जिसके बाद से यह लगातार जारी है। सन 1965 और 1971 में भारत-पाक युद्ध के दौरान इसका आयोजन नहीं किया गया था। लेकिन बंटवारे के बाद से सालों से तनावपूर्ण माहौल के बीच इस दोस्ती का प्रदर्शन हमेशा होता रहता है। बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी करीब 156 सेकंड चलती है। बीएसएफ़ और रेंजर्स के 2 कमांडर और 6 जवान भारत और पाकिस्तान की ओर से इसमें शामिल होते हैं।

अंत में जवान अपने-अपने देश के राष्ट्रीय ध्वज को एक साथ बेहद अचंभित और रोमांचित कर देने वाले खास अंदाज में उतारते हैं। एक-दूसरे से हाथ मिलाते हैं फिर दोनों देशों के दरवाजे बंद हो जाते हैं। उम्मीद की जा रही है कि इसी तर्ज पर जम्मू कश्मीर के ऑक्ट्राय की सेरेमनी में दोनों देश के जवान अपना जलवा बिखरेंगे।

बीटिंग रिट्रीट सेरेमनी में होने वाले मार्च के दौरान जूते पटकने की परंपरा के चलते जवानों को घुटनों में दर्द और कमर से जुड़ी समस्या का सामना करना पड़ता है। पर इस बार भारत सरकार और BSF ने जवानों के लिए विशेष जूते मुहैया कराए हैं ताकि मार्च करने वाले जवानों को इस तरह की समस्याओं का सामना कभी नहीं करना पड़े।

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