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सुकमा हमले में शहीद मनोज का सपना था, बच्चों को हॉस्टल में पढ़ाऊंगा

शहीद मनोज सिंह crpf -फोटो :google

बलिया। छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों के हमले में शहीद हुए CRPF के नौ जवानों में से तीन मनोज सिंह, धर्मेंद्र यादव और शोभित कुमार शर्मा उत्तर प्रदेश के लाल थे। बलिया के उसरौली गांव के सपूत 35 वर्षीय शहीद मनोज सिंह के घर जैसे ही उनकी शहादत की खबर पहुंची परिवार में हाहाकार मच गया। पिता, पत्नी और घर के अन्य सदस्यों की आंखों से आंसू थमने का नाम ही नहीं ले रहे थे।





मनोज के पिता नरेंद्र नारायण सिंह भी CRPF में थे। नौकरी से अवकाश के बाद वह गांव में ही रह रहे हैं। उन्हें बेटे की शहादत पर गर्व है लेकिन बेटे के बारे में बताते हुए उनकी आंखों से आंसू बह निकलते हैं और गला भरभराने लगता है। पत्नी सुमन का तो रो-रोकर बुरा हाल है। उनकी सरकार से मांग है कि इन हमलों को रोकना चाहिए। साथ ही शिकायत भी है कि सुकमा में तैनाती के दौरान सरकार जवानों को कोई सुविधा नहीं देती। सुमन बिलखते हुए बताती हैं कि उनके पति बच्चों को होस्टल में भेजकर अच्छी शिक्षा दिलाना चाहते थे। और वह यह भी चाहते थे कि बच्चे अच्छी परवरिश और अच्छी शिक्षा पाकर देश के काम आएं। शहीद मनोज के दो बेटे हैं प्रिंस और प्रतीक। बड़ा बेटा 6 वर्ष का है और छोटा 4 वर्ष का। इनकी उम्र इतनी छोटी है कि इन्हें पता ही नहीं है कि उनका भविष्य क्या होगा? गांव वाले बस सिर्फ भरोसा ही दिला रहे हैं और यह करते करते उनकी भी आंखें नम हो जाती हैं।

पिछले 17 वर्ष से सुकमा में तैनात मनोज तीन दिन पहले 10 मार्च को 15 दिन की छुट्टी बिताकर  ड्यूटी पर लौटे थे। मई में फिर से आने की बात कही थी। मनोज की मकान बनाने की भी योजना थी लेकिन तमाम सपने और योजनाएं अधूरी रह गई प्रतीत होती हैं। उनका एक भाई दिल्ली में प्राइवेट कंपनी में नौकरी में करता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने शहीद मनोज के परिजनों को 25 लाख रुपये की आर्थिक सहायता देने की घोषणा की है।

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