COURT

अर्ध सैनिक बलों ने जीतीं बड़ी कानूनी जंग

पैरामिलिट्री
फाइल फोटो

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने अर्ध सैनिक बलों को भारी राहत दी है। कोर्ट ने केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों की याचिका पर अंतिम निर्णय देते हुए फैसला सुनाया है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों को ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप- ए सर्विसेस न मानकर नॉन फंक्शनल फाइनेंशियल अपग्रेडेशन से वंचित नहीं रखा जा सकता।





केंद्र सरकार की विचार याचिका एसएलपी पर फैसला सुनाते हुए माननीय अदालत ने यह कहा कि केंद्रीय अर्धसैनिक बल ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप- ए सर्विस से अलग नहीं माने जा सकते । न्यायमूर्ति रोहिंटन फली नरीमन और आरएम शाह की खंडपीठ ने अपने फैसले में यह स्पष्ट कर दिया है कि सरकार को इन बलों के लिए ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप- ए सर्विसेस की तर्ज पर एनएफएफयू का लाभ देना होगा। फैसले में कोर्ट ने कहा है कि चौथे वेतन आयोग से बलों ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप- ए सर्विस न मानना तर्कसंगत नहीं है। सर्वोच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि आईपीएस के अधिकारों विषय में यह कहना कि आरपीएफ में कुछ पदों को आईपीएस के प्रतिनियुक्ति द्वारा भरने के आशय से और आरपीएफ को ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप- ए सेंट्रल सर्विसेज घोषित कर देने मात्र से भारतीय पुलिस सेवा के अधिकारियों के अधिकार कम हो जाएंगे और वे प्रतिनियुक्ति पर नहीं आ पाएंगे यह तर्क देना वाजिब नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में आगे कहा है कि 1986 में बीएसएफ और सीआरपीएफ को ऑर्गेनाइज्ड ग्रुप- ए सर्विस स्वयं सरकार ने माना था दूसरी तरफ सरकार ने अपनी प्रक्रियाओं में भी बीएसएफ, सीआरपीएफ और आईटीबीपी को क्रमशः 1986, 1993 और 2010 में मोनोग्राफ्स वर्गीकृत किए थे और इन्हें ग्रुप- ए केंद्रीय सिविल सर्विस का हिस्सा माना था।

केंद्र और आईपीएस एसोसिएशन की सभी आपत्तियों को खारिज करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के सितंबर 3, 2015 के निर्णय को कायम रखा है जिसमें न्यायमूर्तियों नजमी वजीरी और कैलाश गंभीर की खंडपीठ ने यह फैसला दिया था कि छठे केंद्रीय वेतन आयोग द्वारा अनुशंसित Non-Functional फाइनेंशियल अपग्रेडेशन को केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों के लिए भी लागू किया जाना चाहिए।

गौरतलब है कि केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के अधिकारियों को केंद्र ने आर्गनाइज्ड ग्रुप ए सर्विसेज न मानकर अभी तक एन एफ एफ यू यानी कि Non-Functional Financial अपग्रेडेशन का लाभ नहीं दिया है और वे इसके लिए पिछले लगभग 7 वर्षों से संघर्ष कर रहे थे। इस निर्णय से केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के करीब 6,000 वरिष्ठ अधिकारियों, जिनमें बीएसएफ, सीआरपीएफ, आइटीबीपी, सीआईएसएफ और एसएसबी शामिल हैं, को सीधा लाभ मिलेगा जो वरीय रैंकों पर रिक्तियां न होने के कारण प्रमोशन न मिल पाने की वजह से वित्तीय लाभ से वंचित रह जाते थे।

 

Comments

Most Popular

To Top