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…तो SSB ऐसे रोकेगी मानव तस्करी और बाल मजदूरी

नई दिल्ली: बाल मजदूरी और मानव तस्करी को रोकने के लिए सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) ने कमर कस ली है। सीमा पर मानव तस्करी के लिए एसएसबी ने अभियान छेड़ रखा है। इसके लिए एसएसबी के दिल्ली स्थित मुख्यालय में बल की महानिदेशक अर्चना रामसुंदरम की पहल पर कार्यशाला का आयोजन किया गया।





कार्यशाला में मानव तस्करी और बाल मजदूरी पर अंकुश लगाने पर चर्चा हुई। कार्यशाला का उद्देश्य मानव तस्करी के खिलाफ भारत-नेपाल, भारत-भूटान सीमा के आरपार एवं सशस्त्र सीमा बल की जिम्मेवारी वाली अन्तरराष्ट्रीय सीमाओं के 15 किलोमीटर के दायरे में काम कर रहे सभी सम्बन्धित पक्षकारों को एक साझा मंच प्रदान करना था।

ऐसे लगेगा बाल मजदूरी और मानव तस्करी पर अंकुश

  • राज्य के संवेदनशील और अति संवेदनशील स्थानों को चिन्हित किया जाएगा।
  • कानूनों और कड़ी धाराओं का व्यापक उपयोग किया जायेगा जिसको शीर्ष अधिकारी तय करेंगे।
  • सुदृढ़ समन्वय तन्त्र को विकसित कर लागू करने के लिए राज्य स्तर व मेट्रो शहरों में एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति की जायेगी, जिसमें एसएसबी ने उप महानिरीक्षक (आपरेशन) को नोडल अफसर नामित किया है।
  • अपराध डायरी का अध्ययन कर बदलती अपराधिक कार्य प्रणाली का आदान-प्रदान किया जायेगा।
  • अपराधी का पूरा आंकड़ा, उसके आगे-पीछे की आपराधिक सम्बन्धों की पूरी जानकारी अन्य संस्थाओं से लेकर तैयार की जायेगी ताकि शुरू से अंत तक उसकी पूरी जानकारी उपलब्ध हो सके।
  • उच्च मानीटरिंग के लिये ‘इम्पल्स‘ जैसी कम्पूटर तकनीकी का उपयोग करना पीड़ित के पुर्नवास और अपराधी को दण्डित करने में सहायक होगा।
  • गैर सरकारी संगठनों की सहायता से पुलिस और अर्ध सैनिक बलों के जवानों को प्रशिक्षित कर उनकी दक्षता को बढ़ाया जाएगा।
  • एसएसबी को प्रत्येक राज्य स्तरीय सम्मेलनों में भागीदार बनाना।
  • नेशनल स्किल डेवलपमेन्ट कॉरपोरेशन के साथ सहयोग कर पीड़ित को रोजगारपरक प्रशिक्षण प्रदान कर जीवन में विकास के अवसर प्रदान करना।
  • सभी राज्यों के पुलिस अधिकारियों का एक समूह तैयार करना जोकि त्वरित माध्यम से सूचनाओं व आसूचनाओं का आदान-प्रदान कर सके।
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एसएसबी की कार्यशाला में भारत-नेपाल सीमा पर स्थित राज्यों उत्तर प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल के साथ-साथ पंजाब, मुम्बई, दिल्ली, बेंगलुरू शहरों के पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। पुलिस अधिकारियों के अलावा केन्द्रीय गृह मंत्रालय, श्रम मंत्रालय, मानव संसाधन विकास मंत्रालय, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और नेशनल स्किल डेवलपमेंट कारपोरेशन के प्रतिनिधियों ने भी हिस्सा लिया, जो मानव तस्करी की समस्या से जूझते हैं।

कार्यशाला में मानव तस्करी और बाल मजदूरी पर अंकुश लगाने पर चर्चा की गई

भारत-नेपाल एवं भारत-भूटान सीमा एवं देश के अन्य हिस्सों में कार्य कर रहे 16 गैर सरकारी संगठनों जैसे प्रयास, प्रथम, बचपन बचाओ आन्दोलन, शक्तिवाहिनी, जस्टिस एन्ड केयर, मैती इंडिया आदि संगठनों के प्रतिनिधि भी कार्यशाला में मौजूद थे। इसके अलावा युनाइटेड नेशन्स ऑफिस ऑन ड्रग एवं क्राइम, यू. एन. वीमेन एवं डी. एफ. आई. डी.(यू.के.) के प्रतिनिधियों ने भी कार्यशाला में भाग लिया।

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कार्यशाला में एजेन्डा प्वाइंट के विषयों, जिसमें सीमा पर मानव तस्करी का परिदृश्य, मानव तस्करी की बदलती प्रवृत्ति, रास्ते, व्यापार एवं मानव तस्करी की प्रविधि, सरकारी एवं गैर सरकारी संगठनों की भूमिका एवं विभिन्न पक्षकारों के बीच आपसी समन्वय पर गंभीर विचार विमर्श किया गया।

सभी संस्थाओं और प्रतिभागियों के सहयोग व विचारों से कार्यशाला व्यापक रूप से सफल रही और इस कार्यशाला में मानव तस्करी के रोकथाम के लिये एक सुदृढ़ रोड-मैप तैयार हुआ जिसमें मानव तस्करी को जड़ से समाप्त करने के लिये आपसी समन्वय पर प्रत्येक पक्षकार ने सहमति व्यक्त की।

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