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असम में इस बेजुबां के लिए फ़रिश्ते बन गए SSB के जवान

रेड पांडा

नई दिल्ली। एसएसबी की 38वीं वाहिनी के जवानों ने गुवाहाटी में तेजपुर-तवांग राष्ट्रीय राजमार्ग से एक लुप्तप्राय रेड पांडा को बचा लिया। गलती से यह अपने परिवार से बिछड़ कर रिहायशी इलाके में पहुंच गया था। एसएसबी जवानों ने इसे बचाने के लिए वन अधिकारियों से संपर्क किया। वन अधिकारियों से मिले परामर्श के बाद इसे तुरंत वहां से ले जाकर जंगल में छोड़ दिया गया।





रेड पांडा

रेड पांडा बहुत आलसी होता है और शांत रहता है ये सिर्फ चहकता है (फाइल फोटो)

 

थोड़ी देर और होती तो बन गया होता कुत्तों का भोजन

सशस्त्र सीमा बल (SSB) के प्रवक्ता दीपक सिंह के मुताबिक मंगलवार सुबह जवानों द्वारा सूचना मिली थी कि तेजपुर-तवांग हाईवे पर इस रेड बीअर-कैट को देखा गया जिसे कुत्तों ने चारों ओर से घेर लिया था। स्थानीय ग्रामीणों ने भी इस लुप्तप्राय पशु को बचाने में सीमा सुरक्षा बल के जवानों की मदद की। यदि इसे सही समय पर जवानों द्वारा न बचाया गया होता, तो इसे कुत्ते नोंचकर खा गए होते।

खूबसूरत और शांत जानवर है रेड-पांडा

रेड पांडा को लेजर पांडा और रेड बीअर-कैट कहा जाता है। इसका वैज्ञानिक नाम आइल्यूरस फुलजेन्स है। ये भालू जैसा दिखने वाला जानवर पूर्वी हिमालय और दक्षिण पश्चिमी चीन, असम तथा उत्तरी अरुणाचल प्रदेश में पाया जाता है। यह काला और गहरे ब्राउन रंग का होता है इसकी पूंछ पर काली धारियां होती हैं। पालतू बिल्ली से कुछ बड़ा दिखने वाला ये एक चुप रहने वाला बेहद शांत जानवर अपनी नर्म और फर वाली त्वचा के लिए प्रसिद्ध है। इसकी आगे वाली दो टांगें पिछली टांगों से छोटी होती हैं। ये अपना ज्यादातर वक्त पेड़ के ऊपर ही बिताता है तथा बांस की पत्तियां और कीड़े-मकोड़े इसका भोजन है।

रेड पांडा

बढ़ते शिकार के कारण ये लुप्तप्राय प्रजातियों में शामिल हो चुका है। (फाइल फोटो)

 

रेड पांडा

अपनी फर वाली त्वचा और शांत स्वभाव के लिए प्रसिद्ध है रेड पांडा (फाइल फोटो)

सिक्किम का राजकीय पशु  

इस जानवर की खोज 1821 में हुई थी उस समय इसे भालू के परिवार का सदस्य माना गया था लेकिन बाद में इसे एक अलग परिवार का सदस्य बताया गया। रेड पांडा सिक्किम का राजकीय पशु भी है। वहीं, ये खूबसूरत और शांत जानवर शिकार व विलुप्त होने के कगार पर है और पूरे विश्व में इसकी संख्या तकरीबन 10,000 ही है। चीन द्वारा जारी एक रिपोर्ट के अनुसार पिछले 50 साल में रेड पांडा की संख्या में 40 प्रतिशत की कमी आई है।

रेड लिस्ट में भी शामिल

रेड पांडा को इंटरनेशनल यूनियन फॉर कंजर्वेशन आॅफ नेचर (आईयूसीएन) की रेड लिस्ट में शामिल किया गया था। इस लिस्ट में उन जानवरों पशु-पक्षियों को शामिल किया जाता है जिनकी संख्या तेजी से घट रही है और तथा विलुप्तप्राय जानवरों के संरक्षण के लिए विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।

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