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माओवादियों का काल कहे जाने वाले असिस्टेंट कमांडेंट नरपत सिंह का सम्मान

असिस्टेंट कमांडेंट नरपतसिंह राजपुरोहित

नई दिल्ली। माओवादियों के लिए काल के नाम से मशहूर सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) असिस्टेंट कमांडेंट नरपतसिंह राजपुरोहित को उनके अदम्य साहस व पराक्रम के लिए सम्मानित किया गया है। राजस्थान के सीमावर्ती जिले बाड़मेर के एक छोटे से गांव के निवासी नरपतसिंह राजपुरोहित अपनी बटालियन के हीरो कहे जाते हैं।





वर्तमान में नरपत की पोस्टिंग झारखंड के माओवादी प्रभावित इलाकों में है। वह अपने अदम्य साहस से दुश्मनों को धूल चटाने में सबसे आगे रहते हैं। पिछले माह उन्होंने अपनी जान को जोखिम में डालकर आठ माओवादियों को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया था। झारखंड एवं ओडिशा के माओवाद प्रभावित इलाकों में उनके ख़ौफ़ से या तो माओवादी समर्पण कर रहे हैं या फिर वे इलाका ही छोड़ रहे हैं।

एसएसबी की 18वीं वाहिनी में तैनात नरपतसिंह के उच्च अधिकारी भी उनकी कार्यशैली के कायल बने हुए हैं। इस बहादुर की देश सेवा के जज्बे को लेकर गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने उन्हें सम्मानित किया। इस मौके पर नरपत की पत्नी और बेटा भी मौजूद थे। नरपत ने पत्नी और बेटे संग एसएसबी की महानिदेशक अर्चना रामसुंदरम के साथ तस्वीर भी खिंचवाई।

नरपत सिंह

  • सिर्फ अपनी बटालियन ही नहीं बल्कि देश की 1751 किमी सीमा की निगरानी करने वाली SSB के हीरो हैं
  • झारखंड के जंगलों में देश के दुश्मनों को ढूँढ़ते फिरते हैं
  • नरपत के मुताबिक़ जब यहाँ तैनाती हुई थी तब माओवादियों की सरकार थी
  • अब सब कुछ सामान्य है
  • माओवादियों का सबसे बड़ा हथियार है गुरिल्ला युद्ध
  • लेकिन हम (SSB) भी जवाब तूफानी अंदाज में देते हैं
  • नरपत की टीम सिर्फ एन्काउंटर ही नहीं करती, वह अब तक 8 हार्डकोर माओवादियों को पकड़ भी चुकी है
  • जवानों को यह कर मोटीवेट करते हैं कि कमांडर मैं नहीं आप सब भी कमांडर हो
  • यह बात जवानों में दूना जोश भर देती है

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