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माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में युवाओं को नई राह दिखा रही है ITBP

भिलाई। राजनांदगांव एक माओवाद प्रभावित गांव, जहां अनेक युवा पढ़ाई से मुहं मोड़ चुके थे, नतीजतन यहां युवाओं में माओवाद की तरफ आकर्षण बढ़ रहा था। लेकिन इस गांव के युवा अब बेंगलुरु, पुणे और नोएडा जैसे बड़े शहरों में नौकरी कर रहे हैं। और ये सब संभव हो सका है आईटीबीपी की मदद से। जी हां, बरसों पहले पढ़ाई छोड़ चुके इन युवाओं की काउंसलिंग कर ITBP ने उनमें कुछ कर दिखाने का जज्बा पैदा किया ताकि वे अपनी जिन्दगी में कुछ बेहतर कर सकें।





सिविक एक्शन प्लान के जरिये बेहतर बनाने की कोशिश 

ITBP की चार बटालियन राजनांदगांव जिले के माओवाद प्रभावित क्षेत्र में तैनात हैं। यहां ITBP ने महसूस किया कि यदि युवाओं को रोजगार से जोड़ा जाए तो वे माओवाद की तरफ आकर्षित नहीं होंगे। इसके लिए क्षेत्रीय मुख्यालय बंगलुरु ने एक सिविक एक्शन प्लान बनाया जिसमें युवाओं के माता-पिता की काउंसलिंग की गई। इसके बाद पढ़ाई छोड़ चुके 822 युवाओं का चयन किया गया जिनमें तकरीबन 100 लड़कियां भी शामिल हैं।

बेहतर हो रही है जिन्दगी 

छत्तीसगढ़ राज्य कौशल विकास प्राधिकरण के जरिये पहले 505 युवाओं को कैमिकल एंड फर्टिलाइजर मिनिस्ट्री के सीआईपीईटी(सेन्ट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ प्लास्टिक इंजीनियरिंग एंड टैक्नालोजी) से विभिन्न पाठ्यक्रमों में प्रशिक्षण दिया गया। चार से छ माह बाद 243 युवाओं का चयन महानगरों में स्थित प्लास्टिक इंडस्ट्रीज में किया गया। अब ये युवा अपनी एक नई और बेहतर दुनिया में जीवन-यापन कर रहे हैं। उन्हें देखकर अन्य युवा भी रोजगार की ओर आकर्षित हो रहे हैं।

ITBP छतीसगढ़ के महानिदेशक अशोक नेगी के अनुसार युवाओं को सही समय पर उचित दिशा मिल जाए तो वे माओवाद के रास्ते पर नहीं चलेंगे। यही कारण है कि ITBP सिविक प्लान के जरिये उन्हें जिन्दगी के बेहतर रास्ते पर ले जा रही है।

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