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CISF का भविष्य की जरूरतों और सुरक्षा चुनौतियों पर इंटरनेशनल सेमीनार संपन्न

केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु

नई दिल्ली। केन्द्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) का एविएशन क्षेत्रों में सुरक्षा चुनौतियां पर विचार-विमर्श करने तथा विचार विश्लेषण करने के उद्देश्य से आयोजित इंटरनेशनल एविशन सिक्योरिटी सेमीनार भविष्य की जरूरतों का आधार और कार्ययोजना बनाने के साथ संपन्न हो गया।





नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित भव्य समापन समारोह में बतौर मुख्य अतिथि केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री सुरेश प्रभु ने कहा कि सरकार जल्द ही देशभर में करीब 200 हवाई अड्डों को जोड़ने के लिए नई एयर ट्रैवल पॉलिसी के साथ आ रही है। उन्होंने पूरी प्रतिबद्धता के साथ राष्ट्रीय संपत्तियों की रक्षा करने के लिए CISF की खचाखच भरे विज्ञान भवन में सराहना की। इस अवसर पर नागरिक उड्डयन राज्य मंत्री जयंत सिन्हा ने कहा कि सरकार अगले 15 वर्षों की योजना बना रही है ताकि सुरक्षा और टेक्नॉलॉजी की जरूरतों को पूरा किया जा सके।

CISF के महानिदेशक राजेश रंजन

CISF के महानिदेशक राजेश रंजन ने दो दिन की संगोष्ठी पर हुई चर्चा तथा विचारों पर प्रकाश डाला और कहा कि विचारों का यह आधार भविष्य में ठोस कार्ययोजना का नेतृत्व करेगा। दो दिवसीय सेमीनार का उद्घाटन केन्द्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था।

कार्यक्रम में बोलते हुए सुरेश प्रभु

सेमीनार में एविएशन क्षेत्र के अंतर्ऱाष्ट्रीय विशेषज्ञों, अधिकारियों और सेवानिवृत अफसरों ने विमानन क्षेत्र की सुरक्षा के सभी पहलुओं पर बारीकी से विचार-विमर्श किया। सेमीनार में पैनल चर्चा के लिए सात सत्र आयोजित किए गए थे। इसकी अध्यक्षता विशेषज्ञों ने की थी। इन विशेषज्ञों में थे-सिविल एविएशन सचिव आरएन चौबे, गृह सचिव राजीव गाबा, डिप्टी राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार राजेंद्र खन्ना, ब्यूरो ऑफ सिविल एविएशन सिक्योरिटी के महानिदेशक कुमार राजेश चंद्र, सिविल एविएशन अकेडमी के निदेशक हरीन्द्र नाथ, CISF के महानिदेशक राजेश रंजन तथा सीमा शुल्क के प्रधान आयुक्त ओपी दाधीच।

CISF के स्वर्ण जंयती वर्ष पर आयोजित इस सेमीनार में देश-विदेश के विशेषज्ञों ने बड़ी शिद्दत के साथ भाग लिया।

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