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कश्मीर में अलादीन का चिराग! CRPF का टोल फ्री फोन नंबर 14411 जारी

नई दिल्ली। तीन दशक से आतंकवाद झेल रहे जम्मू-कश्मीर में आम जनता के बीच सुरक्षा बलों की छवि बेहतर बनाने की कवायद में एक और कड़ी जुड़ गई है। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) की ‘मददगार’ स्कीम इसी का एक हिस्सा बन गई है। टोल फ्री फोन नंबर 14411 इस स्कीम का सूत्रधार है। यह अनूठी स्कीम सीआरपीएफ के आईजी (आपरेशन) जुल्फिकार हसन के दिमाग की उपज है जिसकी तारीफ़ लांच करते हुए राज्यपाल एनएन वोहरा ने की और उन्हें बधाई दी। राज्यपाल ने कहा कि यह उन कश्मीरी नौजवानों के लिए नए रास्ते खोलने वाली योजना है जो राज्य से बाहर भी अवसर तलाशना चाहते हैं।





  • इस हेल्पलाइन के जरिये पर्यटक और खासतौर से माता वैष्णो देवी या अमरनाथ तीर्थ से जुड़ी जानकारियाँ भी पा सकेंगे।
  • करीब सवा तीन लाख तादाद वाली सीआरपीएएफ की 47वीं बटालियन जम्मू-कश्मीर में तैनात है। यानी करीब 52 हजार जवान तैनात हैं। सीआरपीएफ कश्मीर में आंतरिक सुरक्षा के लिए प्रमुख फोर्स है।

कश्मीर में लोग किसी भी तरह की मुसीबत में फंसे हों, कोई मेडिकल इमरजेंसी हो, महिलाओं की सुरक्षा का मसला हो और चाहे किसी नौजवान को अर्द्धसैनिक बल में भर्ती की इच्छा के लिए काउंसिलिंग चाहिए हो- ये नंबर हर काम में मददगार होगा। राज्यपाल एनएन वोहरा ने आज श्रीनगर में मददगार नंबर 14411 की शुरुआत की।

सीआरपीएफ

राज्यपाल एनएन वोहरा श्रीनगर में सीआरपीएफ के ‘मददगार’ नंबर 14411 की शुरुआत करते हुए। इस मौके पर उप मुख्यमंत्री निर्मल सिंह, सीआरपीएफ के महानिदेशक राजीव राय भटनागर और जम्मू-कश्मीर पुलिस के महानिदेशक एसपी वेद के अलावा अन्य अधिकारी मौजूद थे

जुल्फिकार हसन

सीआरपीएफ के आईजी (आपरेशन) जुल्फिकार हसन

CRPF प्रवक्ता के मुताबिक़ इस हेल्पलाइन के जरिये पर्यटक और खासतौर से माता वैष्णो देवी या अमरनाथ तीर्थ से जुड़ी जानकारियाँ भी पा सकेंगे। कुछ मामलों में CRPF से सीधे मदद मिलेगी तो कुछ लोगों को सम्बंधित विभाग से जोड़कर मदद दिलाई जाएगी। जम्मू-कश्मीर में लोगों और सरकारी विभागों के बीच सेतु का काम करने वाली इस हेल्पलाइन की तैयारी काफी पहले से की जा रही है। इससे सम्बंधित एक आदेश राज्य के मुख्य सचिव ने इसी साल जारी किया था।

कश्मीर में आतंकवाद की वजह से हिंसा, पत्थरबाजी, प्रदर्शनों के अलावा कई बार खराब होने वाले मौसम (खासतौर से बर्फबारी) जैसे हालात की वजह से लोगों को सामान्य जीवन जीने में चुनौतियां आती हैं। कई बार बंद और कर्फ्यू हालात को और गंभीर बना देते हैं। ऐसे में सुरक्षा बलों और पुलिस का दखल इन हालात में होना लाजमी है। ऐसे में कई बार सुरक्षाकर्मियों की कार्रवाई आलोचना का केंद्र बिंदु बनती है जिससे उनकी छवि स्थानीय निवासियों में खलनायक सी बन जाती है। मददगार हेल्पलाइन उस छवि में सुधार की भी एक कोशिश है।

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