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ये हैं ‘बांदीपोरा हमला’ नाकाम करने वाले CRPF के रियल हीरो

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श्रीनगर। अपनी जांबाजी के बल पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF-सीआरपीएफ) की 45वीं बटालियन के दो जवानों कांस्टेबल प्रफुल्ल कुमार और कांस्टेबल के. दिनेश राजा ने देश को गौरवान्वित किया है। सोमवार को हुए हमले के दौरान इन दोनों ही जवानों ने आतंकियों को कैंप में घुसने से पहले ही नेस्तनाबूद कर डाला। जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में सोमवार को सुरक्षाबलों ने चार आतंकियों को ढेर कर दिया था। आतंकियों ने सुम्बल स्थित सीआरपीएफ कैम्प में घुसने की कोशिश की थी।





सहरी छोड़ न भागते CRPF कमांडेंट इकबाल तो…
सीआरपीएफ जवान

आतंकी मंसूबों का खात्मा करने के बाद जोश और जज्बों के साथ जवान

  • कैंप के प्रवेश द्वार पर ड्यूटी कर रहे थे दोनों जवान

सोमवार तड़के तीन बजकर 30 मिनट पर जब आतंकियों ने कैंप में घुसने की कोशिश की तब 45 बटालियन की डेल्टा कंपनी के कांस्टेबल प्रफुल्ल कुमार को पिकेट नंबर दो पर मुख्य प्रवेश द्वार पर ड्यूटी के लिए भेजा गया था, जबकि चार्ली कंपनी के कांस्टेबल दिनेश राजा यहां पर स्टेंडिंग गार्ड की ड्यूटी पर थे और टॉवर नंबर एक की चौकीदारी कर रहे थे।

  • कुत्ते ने दी पहली सूचना

कांस्टेबल कुमार ने अचानक दो कुत्तों के भौंकने की आवाज सुनी और एक रोशनी दिखी, जिससे वह चौकन्ने हो गए। कुमार के मुताबिक मैंने अपनी सर्चलाइट कई बार आॅन-आॅफ की और जांच पड़ताल की, लेकिन जब मैं सर्चलाइट आॅफ करता तो दो कुत्ते और भी तेज भौंकना शुरू कर देते थे। इससे मुझे और भी शक हुआ।

मैंने दोबारा कुत्तों के भौंकने की दिशा में सर्चलाइट आॅन की, मैंने एक आतंकी को गन के साथ बाड़े के पास चलते हुए देखा। मैंने सोच-समझकर उस पर फायर कर दिया और तुरंत अलार्म दबा दिया। बिहार के मुंगेर जिले के रहने वाले प्रफुल्ल कुमार ने वर्ष 2011 में सीआरपीएफ ज्वाइन की थी। कुमार के मुताबिक मैंने पत्थरबाजी देखी है, लेकिन पहली बार इस तरह चार आतंकवादियों को मार गिराने वाले एनकाउंटर का हिस्सा बना हूं।

  • पंद्रह मिनट तक उलझाए रखे आतंकी

इसी तरह तमिलनाडु के रहने वाले कांस्टेबल के दिनेश राजा टॉवर वन ड्यूूटी पर थे। उन्होंने देखा कि कांस्टेबल कुमार सर्चलाइट बार-बार आॅन-आॅफ कर रहे हैं। ये जानने के लिए कि वहां क्या हुआ है उन्होंने भी अपनी सर्चलाइट आॅन की और क्षेत्र का परीक्षण करना शुरू किया। वे तुरंत एक साथ हो लिए और देखा कि दो आतंकी बाड़े के पास से कैंप में घुसने की कोशिश कर रहे थे। हमने तुरंत फायरिंग शुरू कर दी तथा अन्य जवानों के पहुंचने तक पंद्रह मिनट तक आतंकियों को उलझाए रखा।

सीआरपीएफ-45वीं-वाहिनी

सीआरपीएफ 45वीं वाहिनी की जवाबी कार्रवाई में ढेर हुए चारों आतंकी

  • घायल होने पर भी कैंप की तरफ बढ़ रहे थे आतंकी

25 वर्षीय कुमार के अनुसार, जब वह टॉवर पर थे तो उन्होंने देखा कि आतंकी कैंप से केवल 40-50 मीटर की ही दूरी पर थे। पहली फायरिंग में घायल हुए एक आतंकी ने घायल होने के बावजूद कैंप की तरफ बढ़ना जारी रखा। दोनों जवानों ने फायरिंग जारी रखी और उन्हें मार गिराया। अन्य दो आतंकी अन्य जवानों की मदद से मारे गए। वर्ष 2016 में घाटी में पोस्ट हुए अपनी बहादुरी से बेखबर कांस्टेबल राजा कांस्टेबल प्रफुल्ल कुमार के साथ ही कहते हैं कि वे सिर्फ अपना कर्तव्य और अपनी ड्यूटी निभा रहे थे।

  • मुठभेड़ के दौरान करना पड़ा पावर कट का सामना

45 बटालियन के कमांडेंट इकबाल अहमद के मुताबिक, इस एक घंटे की मुठभेड़ के दौरान जवानों को पावर कट का सामना भी करना पड़ा जिसके कारण कैंप के आसपास छिपे अन्य दो आतंकियों को ढूँढ़ना मुश्किल हो रहा था। हमारी त्वरित रिएक्शन टीम ने एनकाउंटर के बीच आग की मदद से रोशनी की और रोशनी व धुएं के कारण आतंकी अपना रास्ता बदलने में नाकामयाब रहे अन्यथा वे अंधेरे का फायदा उठाकर भाग सकते थे।

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