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एके-47 लिए नक्सलियों को ढूंढती रहती है CRPF की ‘उषा’, पापा-बाबा भी CRPF में

उषा किरण

बस्तर: छत्तीसगढ़ में कई ऐसे जिले हैं जो लम्बे समय से माओवाद का दंश झेल रहे हैं। इन्ही में से एक जिला है बस्तर। लगभग तीन दशक से माओवाद का दंश झेल रहा बस्तर अब शांति की ओर बढ़ा रहा है। जहां एक ओर माओवादियों के सफाए के लिए लगातार ऑपरेशन चलाए जा रहे हैं, तो वहीं दूसरी ओर अब माओवादियों से लोहा लेने के लिए सीआरपीएफ में पहली बार महिला अधिकारी की नियुक्ति की गई है, जो माओवादियों के सबसे सुरक्षित इलाके दरभा में अपनी टुकड़ी के साथ माओवादियों की तलाश कर रही है। इसका नाम है उषा किरण। बस्तर में तैनात की गईं उषा किरण सीआरपीएफ की पहली महिला असिस्टेंट कमांडेंट हैं। माओवादियों के लिए सबसे सुरक्षित माने जाने वाले दरभा में महिला अधिकारी की तैनाती से माओवादियों के पैर उखड़ने लगे है।





अकेले ही नक्सलियों को ढूंढने जंगलों में निकल पड़ती हैं उषा किरण

25 मई 2013 दरभा जीरम। बस्तर के इतिहास का एक काला दिन। इसी दिन माओवादियों ने दरभा इलाके में खूनी खेल खेला, जहां कांग्रेस के कई बड़े दिग्गज नेता सहित कई पुलिस के जवान शहीद हो गए थे और माओवादियों ने इस इलाके को अपना गढ़ बना लिया। उन्होंने इस इलाके में लगातार वारदातों को अंजाम देकर अपना खौफ बनाए रखा। लेकिन समय के साथ-साथ अब दरभा बदल गया है। इस इलाके में पुलिस जवानों के साथ-साथ अब महिला कमांडो ने भी मोर्चा संभाल लिया है और माओवादियों को इलाके से लगातार पीछे धकेला जा रहा है।

जंगलों में माओवादियों की तलाश में बेखौफ घूमती रहती हैं उषा किरण

उषा किरण नक्सलियों से दो-दो हाथ करने के लिए हर समय तैयार रहती हैं। वह कहती हैं कि सीआरपीएफ में जो ट्रेनिंग दी गई है, हम उसी के अनुसार काम करते हैं। उन्होंने कहा कि बस्तर की भौगोलिक स्थितियां सब जगह से अलग हैं। ऐसे में कब कहां माओवादियों से मुठभेड़ हो जाए, कहा नहीं जा सकता।

उषा किरण अपनी टुकड़ी के जवानों के साथ

 

 

महिलाओं के लिए सबसे सुरक्षित जगह है फोर्स

उषा किरण का यह भी कहना था कि यह कहना गलत होगा कि महिलाओं के लिए फोर्स में जगह नहीं है। सबसे सुरिक्षत जगह अगर कहीं है तो वह फोर्स है।

सीआरपीएफ पर आरोप लगाने वालों का जवाब हैं उषा

उषा के साथ काम करने वाले अधिकारी का मानना है कि उनकी टीम में महिला ऑफिसर के आने के बाद जवानों का हौसला बढ़ गया है। महिला अधिकारी के साथ कदम से कदम मिलाकर माओवादी मोर्चे पर काम किया जा रहा है।

उषा किरण स्थानीय महिलाओँ के साथ

वे कहते हैं कि महिला अधिकारी का आना उन आरोपों का मुंहतोड़ जवाब है, जो अकसर सीआरपीएफ पर लगाते हैं। इसके साथ ही जंगलों में सर्चिंग के दौरान जो महिलाएं मिलती हैं, उनसे महिला अधिकारी होने के कारण इलाके की जानकारी जुटाने में भी मदद मिलती है और माओवादियों की खबर भी मिल जाती है। उषा किरण को स्थानीय महिलाएं भी पसंद करती हैं।

फौजी परिवार से संबंध रखती हैं उषा किरण

असिस्टेंट कमाडेंट उषा किरण फौजी परिवार से संबध रखती है। उनके दादा सीआरपीएफ में थे, जबकि पिता अब भी सीआरपीएफ में है। उनका भाई आरपीएफ में है और उनकी बहनें पुलिस में आने की तैयारी मे जुटीं है। महिला अधिकारी की तैनाती से बस्तर के आदिवासी महिलाओं मे भी फोर्स के प्रति रूझान देखा जा रहा है। बहरहाल बस्तर में पहली महिला सीआरपीएफ कमांडेंट के आने के बाद सुरक्षा बलों का मनोबल बढ़ा है।

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