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पिता की व्यथा- मेरे बेटे को तो ‘घर’ के लोगों ने ही मार डाला

सुकमा हमला

नई दिल्ली। “मुझे गर्व उस वक्त और होता जब मेरा बेटा विदेशियों के साथ मुठभेड़ में शहीद होता लेकिन यहाँ तो ‘घर’ के लोगों ने ही उसे मार डाला। यह दर्द गजेन्द्र मिश्रा का है जो 24 साल के उस कांस्टेबल अभय मिश्रा के पिता हैं जिसे सोमवार को सुकमा में 300-400 हथियारबंद माओवादियों ने बुर्कापाल और चिंतागुफा के बीच घात लगाकर मार डाला था। इस हमले में सीआरपीएफ (CRPF) के कुल 25 जवान शहीद हो गए थे।





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शहीद अभय मिश्रा (बाएँ) की फाइल फोटो और उसकी मां

बिहार के भोजपुर जिला के जगदीशपुर थाना क्षेत्र के तुलसीहरि गांव निवासी गजेन्द्र के दो बेटों में अभय बड़े थे। इस परिवार के भरण-पोषण की जिम्मेदारी अभय के कन्धों पर ही थी। सीआरपीएफ में अभय की नियुक्ति तीन साल पहले ही हुई थी। अगले महीने अभय एक शादी में शिरकत करने के लिए घर लौटने वाले थे। बड़े भाई की शहादत से छोटे भाई अमित दुखी तो बहुत हैं पर फ़ोर्स में जाने का इरादा अभी भी अटल है। उसका कहना है कि देश की सेवा के लिए सेना में भर्ती होना चाहता हूँ। अमित ने बताया कि डेढ़ महीने पहले अभय की जांघ में गोली लगी थी लेकिन घर जाने की अनुमति नहीं मिली। रायपुर के अस्पताल में इनका इलाज हुआ था। अभय की शहादत से गांव के साथ पूरा देश मर्माहत है। शहीद की माँ माधुरी देवी ने अपने बेटे की मौत के बाद सुध बुध खो दी है।

शहीद अभय मिश्रा के पिता गजेंद्र राज्य सरकार से काफी नाराज दिख रहे थे। उन्होंने कहा कि शहीद के शव के लिए जब सरकार दो गज जमीन नहीं दे सकती तो यह 5 लाख की राशि किस काम की है। हम ऐसी राशि को ठुकराते हैं। सरकार के मंसूबे पर सवालिया निशान खड़ा करते हुए कहा कि सरकार को नक्सलियों पर जल्द से जल्द कार्रवाई करनी चाहिए। परिजनों ने बताया कि अभय पांच माह पहले छुट्टी पर घर आये थे, सब कुछ ठीक-ठाक चल रहा था। अभय के 2 साल के बेटे आयुष ने अपने पिता को मुखाग्नि दी।

एक वर्ष बाद रिटायर होने वाले थे करनाल निवासी कांस्टेबल राममेहर

सुकमा हमला

शहीद राम मेहर के शव पर पुष्प अर्पित करते लोग

करनाल निवासी कांस्टेबल राममेहर का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों ने शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

बुधवार की सुबह शहीद राममेहर का पार्थिव शरीर उनके गांव खेड़ी मान सिंह पहुंचा। वहां पर पहले से ही मौजूद हजारों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गयी। शहीद के परिजनों व उनकी पत्नी पूनम और दोनों बच्चों को अंतिम दर्शन कराने के बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया गया। जहां पर शहीद का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद राममेहर एक मई को अवकाश पर अपने घर आने वाले थे। यही नहीं एक वर्ष बाद रिटायर भी होने वाले थे। हरियाणा सरकार ने शहीद के परिजनों को पचास लाख रुपये की आर्थिक मदद करने की घोषणा मंगलवार को ही कर दी थी।

सोनीपत के नरेश का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

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सोनीपत के शहीद नरेश का राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार

सोनीपत निवासी एएसआई नरेश कुमार का बुधवार को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। शहीद की अंतिम यात्रा में हजारों लोगों ने शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी। सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल होकर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

बुधवार की सुबह शहीद नरेश कुमार का पार्थिव शरीर उनके गांव टिकोला पहुंचा। शहीद का पार्थिव शव मंगलवार की शाम को ही उनके गांव पहुंचना था, लेकिन किन्हीं कारणों से नहीं पहुंच पाया था। शहीद का पार्थिव शरीर बुधवार की सुबह जैसे ही उनके गांव पहुंचा पहले से ही मौजूद हजारों की संख्या में उपस्थित ग्रामीणों में शोक की लहर दौड़ गयी। शहीद के परिजनों व उनकी पत्नी राजबाला और बच्चों को अंतिम दर्शन कराने के बाद उनके पार्थिव शरीर को अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाया गया।

दरभंगा के शहीद नरेश यादव का हुआ अंतिम संस्कार

सुकमा हमला

शहीद नरेश यादव का परिवार (ऊपर) और बेसुध पत्नी

दरभंगा। शहीद जवान नरेश यादव का पार्थिव शरीर बुधवार की सुबह लहेरियासराय नेहरू स्टेडियम पहुंचा और वहां से लगभग छह किलोमीटर दूर स्थित उनके गांव अहिला लाया गया जहां उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया। बड़े पुत्र अमित कुमार ने पिता को मुखाग्नि दी।

शहीद जवान के दोनों पुत्र पिता के पार्थिव शरीर को देखकर फूट-फूट कर रोने लगे। कई बार दोनों पुत्र बेहोश हो जा रहे थे। शहीद के वृद्ध पिता अपने बेटे के किए वादों को याद कर उन्हें जिंदा देखने की रट लगाए हुए थे। वह कह रहे थे बेटा ने वादा पूरा किया लेकिन बंद आखों से।

घर पहुंचा सुकमा में शहीद अरूप का शव, पश्चिम बंगाल के अभयपुर में मातम

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शहीद अरूप कर्मकार का शव एयरपोर्ट से उनके गृह क्षेत्र ले जाया गया

पश्चिम बंगाल के शहीद अरूप कर्मकार का शव बुधवार की रात उनके घर नदिया के करीमपुर स्थित अभयपुर ग्राम पहुंच गया। शहीद बेटे का शव देखकर उनकी मां सहित अन्य संबंधियों के आंसू जैसे रुकने का नाम नहीं ले रहे थे।

सोमवार रात अरूप के घर खबर दी गयी कि अरूप कर्मकार सुकमा हमले में शहीद हो गये हैं। यह खबर पाकर पूरा परिवार शोक में डूब गया। बुधवार रात ही उनका शव उनके घर जवानों ने पहुंचाया। साथ में पुलिस की वैन भी थी। इस दुख की घड़ी में पूरा अभयपुर गांव शहीद परिवार के साथ खड़ा हो गया है।

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