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सुकमा हमले के बाद गुस्से में सरकार, 8 मई को बनेगी आगे की रणनीति

सुकमा: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के जवानों के खिलाफ माओवादियों ने एके-47 के अलावा 10 राउंड ग्रेनेड लांचर का भी इस्तेमाल किया। 25 जवानों को मौत के घाट उतारने वाले नक्सली दरअसल इस इलाके में सरकार द्वारा बनाई जा रही सड़कों के कारण गुस्से में हैं। उन्हें लगता है कि अगर सड़कें बन गईं तो उनके लिए मुश्किल हो जाएगी। इस बीच, कुछ जवानों के लापता होने की खबरें भी सामने आ रही हैं लेकिन सीआरपीएफ मुख्यालय ने इस संबंध में कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी है। इस बीच शहीद जवानों के शवों को रायपुर ले जाया गया। यहां से उनके शव गृह जिले में ले जाए जाएंगे।





सुकमा में माओवादियों से मुठभेड़, सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद

उधर केंद्रीय मंत्री राजनाथ सिंह सुबह रायपुर पहुंचे। उन्होंने श्रद्धांजलि अर्पित करने के बाद माओवादियों की हरकत को ‘कोल्ड ब्लडेड मर्डर’ करार दिया। उन्होंने कहा, हमने इसे चुनौती के रूप में लिया है। सुकमा हमले को लेकर देश के लोगोें में रोष व्याप्त है और सरकार भी गुस्से में है। इस बात का अंदाजा आप इसी से लगा सकते हैं कि गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि किसी भी हाल में माओवादियों को उनके मकसद में कामयाब नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि अगर यहां पर अधिक अफसरों की पोस्टिंग करनी होगी तो की जाएगी। 8 मई को इस मुद्दे पर उच्चस्तरीय बैठक होगी, जिसमें नई रणनीति पर चर्चा होगी। उन्होंने कहा कि हमें सीआरपीएफ के नेतृत्व पर कोई शक नहीं है।

माओवादी हमले के बाद गृहमंत्री ने माओवाद प्रभावित दस राज्यों की मीटिंग बुलाई है। इस बैठक में राज्यों के मुख्यमंत्री और शीर्ष अधिकारी हिस्सा लेंगे। बैठक में राज्यों के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक भी बैठक में शिरकत करेंगे। इनके अलावा 35 सबसे ज्यादा नक्सल प्रभावित जिलों के जिलाधिकारी और एसपी भी बैठक में शामिल होंगे। इतना ही नहीं बैठक में अर्धसैनिक बलों के डीजी भी हिस्सा लेंगे। इस बैठक का सबसे बड़ा एजेंडा आंतरिक सुरक्षा रहेगा। इसके अलावा रेड कॉरीडोर को नए सिरे से परिभाषित किया जा सकता है। इस रेड कॉरिडोर से उन जिलों को निकाला जाएगा जहां पिछले तीन-चार साल में कोई नक्सली घटना नहीं हुई है। आपको बता दें कि 108 जिलों में से सिर्फ 68 जिलों में नक्सल समस्या रह गई है।

कभी कामयाब नहीं हो पाएंगे माओवादी

राजनाथ सिंह ने कहा कि सुकमा में जो हमला किया गया है वह बेहद कायरतापूर्ण है, आदिवासियों को अपनी ढाल बनाकर विकास के खिलाफ जो अभियान छेड़ा जा रहा है इसमें माओवादी कभी कामयाब नहीं होंगे। केंद्र और राज्य साथ मिलकर इसपर कार्रवाई करेंगे। उन्होंने कहा कि हम अपने जवानों का बलिदान व्यर्थ नहीं जानें देंगे, इसे हमनें चुनौती के रूप में स्वीकार किया है। यह एक सोची समझी हत्या है। माओवादी नहीं चाहते हैं कि आदिवासी क्षेत्र का विकास हो। राजनाथ सिंह ने शहीदों के प्रति संवेदना व्यक्त की।

राजनाथ सिंह ने कहा कि हम अपनी रणनीति को सभी के सामने नहीं बता सकते हैं। हम अपनी रणनीति पर काम करेंगे और दोबारा से नई रणनीति बनाएंगे। राजनाथ ने कहा कि पिछले काफी समय से राज्य और केंद्र से मिलकर नक्सलियों के खिलाफ अभियान चलाया है, जिससे नक्सलियों के हौसले पस्त हैं।

घायल जवानों से गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मुलाकात की

शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देने के बाद राजनाथ सिंह घायल जवानों से मिलने रामकृष्ण अस्पताल गए। इससे पहले केंद्रीय गृह मंत्री सीआरपीएफ कमांडेंट ऑफिस में अफसरों की उच्च स्तरीय बैठक ली। बैठक में मुख्यमंत्री, राज्यपाल, सीआरपीएफ के महानिदेशक समेत राज्य के आला पुलिस अधिकारी भी मुख्य रूप से मौजूद रहे।

इतने माओवादी एक साथ, क्या कर रहा है सेटेलाइट सिस्टम?

बता दें कि छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए सीआरपीएफ के जवानों पर हमले से पूरा देश गुस्से में है। सोमवार को हुए इस हमले में कुल 25 जवान शहीद हुए हैं, तो वहीं 7 जवान घायल हुए हैं। अभी भी सीआरपीएफ के कंपनी कमांडर समेत 6 जवान लापता हैं। हमले के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, गृहमंत्री राजनाथ सिंह समेत देश की सभी बड़ी हस्तियों और लोगों ने दुख जताया।

मुठभेड़ स्थल पर बड़ी मात्री में दगे हुए कारतूस मिले। इस माओवादी हमले में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हुए हैं।

कब और कैसे हुआ हमला

जानकारी के मुताबिक, सीआरपीएफ के ये जवान सोमवार सुबह 8।30 बजे गश्त पर निकले थे। जवान अपने कैंप दुर्गपाल से रोड ओपनिंग पार्टी के तौर पर निकले। दुर्गपाल से करीब 2 किलोमीटर की दूरी पर चिंतागुफा के पास दो हिस्सों बंट गए। जवानों की संख्या 99 थी। जवानों के दोनों दस्ते करीब 500 मीटर ही आगे बढ़े थे कि उन पर हमला हो गया। घात लगाकर बैठे करीब 300 नक्सलियों ने जवानों को निशाना बनाया।

माओवादियों के पास AK-47 जैसे हथियार थे। जानकारी ये भी है कि इन नक्सलियों के साथ महिला फाइटर भी थीं। नक्सलियों ने 12 मार्च को CRPF पर हमले के दौरान लूटे गए हथियारों का भी इस्तेमाल किया। बताया जा रहा है कि नक्सलियों ने जवानों को निशाना बनाने के लिए IED ब्लास्ट भी किया। हमले के बाद सीआरपीएफ एक्शन में है, और उन्होंने चिंतागुफा इलाके के पास नक्सलियों के खिलाफ कॉम्बिंग आपरेशन भी चलाया है।

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