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सुकमा हमला: खामियां तलाशने के लिए विस्तृत जांच के आदेश

सुकमा जिले में माओवादियों की करतूत

नई दिल्ली: सुकमा में नक्सलियों के हमले में सीआरपीएफ के जवानों के मारे जाने की घटना क्या रोकी जा सकती थी? क्या इस समय के सीआरपीएफ के ऑपरेशन में कुछ खामियां थी? क्या सीआरपीएफ की उस टुकड़ी ने कोई भूल की थी? इन तमाम सवालों के जवाब तलाशने के लिए सीआरपीएफ को विस्तृत जांच करने के आदेश दिए गए हैं।





इस बीच गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने मंगलवार को लोकसभा में छत्तीसगढ़ के सुकमा में हुए सीआरपीएफ के जवानों पर माओवादी हमले पर बयान दिया। उन्होंने कहा कि वामपंथी उग्रवादियों किसी भी कीमत पर कामयाब नहीं होने दिया जाएगा और शहीद जवानों के बलिदान को व्यर्थ नहीं जाने देंगे।

राजनाथ सिंह ने घटना की विस्तृत जानकारी सदन को देते हुए कहा कि दिनांक 11 मार्च 2017 को सीआरपीएफ की दो कंपनियां सुकमा के भेजी वरखा इंजी नाम सड़क निर्माण की सुरक्षा हेतु तैनात थी। लगभग 8 बजकर 53 मिनट पर जब सुरक्षा बल गांव बाकूपड़ा से सटे जंगलों में पहुंचे तो वहां पहले से घात लगाकर बैठे वामपंथी उग्रवादियों ने जवानों पर भारी हथियारों और आईईडी से हमला किया। इस घटना में 12 जवान शहीद हो गए और दो गंभीर रूप से घायल हो गए। घायल जवानों की हालत अब ठीक है। उन्होंने कहा कि घायल जवानों की अच्छी से अच्छी चिकित्सा सेवा की जाएगी। उग्रवादी 13 हथियार और उनके वायरलेस लूटकर ले गए।

विडियो: सौजन्य से लोकसभा टीवी

राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि माओवादी ऐसा बौखलाहट में कर रहे हैं। वह सुरक्षाबलों की कार्रवाई से डरे हुए हैं। वर्ष 2016 में सुरक्षाबलों ने सभी वामपंथी प्रभावित राज्यों खासकर छत्तीसगढ़ में जबरजस्त सफलता प्राप्त की और 135 उग्रवादियों को मार गिराया। 779 को गिरफ्तार किया और 1,198 ने आत्मसमर्पण किया। छत्तीगढ़ में वर्ष 2015 की तुलना में 2016 में वामपंथी उग्रवाद की घटनाओं में 15 फीसदी की कमी आई है तथा हिंसक घटना 2015 में 466 से घटकर 2016 में 395 हो गई। पिछले वर्ष के सभी आकड़े सुरक्षाबलों की कुशलता और कार्यदक्षता का परिणाम है।

उन्होंने सदन को बताया कि वर्ष 2015 के मुकाबले 2016 में वामपंथी उग्रवादियों के आत्मसमर्पण और गिरफ्तारी में 47 फीसदी की वृद्धि हुई है। 2016 में सुरक्षाबलों ने 3 हथियार गवाएं जबकि 2015 में यह संख्या 15 थी। उन्होंने बताया कि 2015 में 89 उग्रवादियों को सुरक्षाबलों ने मारा था, जबकि 2016 में यह संख्या 222 थी। राजनाथ सिंह ने सदन में बताया कि उन्होंने मामले की विस्तृत रिपोर्ट सीआरपीएफ के महानिदेशक से सौंपने के लिए कहा है।

गौरतलब है कि, सड़क निर्माण की सुरक्षा में लगे सीआरपीएफ के जवानों पर 11 मार्च को हमला कर दिया था। इस हमले में 10 जवानों की मौके पर मौत हो गई थी, जबकि 2 जवानों ने अस्पताल के रास्ते दम तोड़ दिए था। घटना में दो जवान गंभीर रूप से घायल भी हुए थे। घायल जवानों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। गृहमंत्री के मुताबिक, घायल हुए जवानों की बेहतरीन तरीके से इलाज किया जा रहा है और उनकी हालत अब ठीक है और वह खतरे से बाहर हैं।

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