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सीआरपीएफ के क्रेकर ने अपनी शहादत देकर ऐसे बचाई जवानों की जान

बीजापुर। एक बेजुबान लेकिन वफादार ने अपनी जान देकर न जाने कितने जवानों की जान बचा ली। माओवादियों ने जाल तो जवानों को मारने का बिछाया था पर इस बेजुबान ने सारी बला अपने ऊपर ले ली। इस बेजुबान का नाम है क्रेकर। वह सीआरपीएफ का खोजी कुत्ता था। क्रेकर के बलिदान को सीआरपीएफ ने शहीद की तरह लिया और पूरे राजकीय सम्मान के साथ उसे अंतिम विदाई दी।





क्रेकर को 2015 में सीआरपीएफ में शामिल किया गया था

दरअसल, छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में माओवादियों द्वारा बिछाए गए प्रेशर बम में विस्फोट से सीआरपीएफ का एक स्निफर डाग ‘क्रेकर’ शहीद हो गया, वहीं उसके साथ चल रहे उसके हैंडलर अवनीश और एक कांस्टेबल भानुप्रकाश रेड्डी घायल हो गए। जिला पुलिस के एक अधिकारी ने बताया कि यह घटना उस समय हुई जब सीआरपीएफ की 170 वीं बटालियन की रोड ओपनिंग पार्टी (आरओपी) अपने शिविर में वापस लौट रही थी।

क्रेकर को दुलारते हुए सीआरपीएफ के जवान (फाइल फोटो)

एसपी केएल ध्रुव ने बताया कि मोदकपाल थाने से कल सुबह पुलिस का संयुक्त बल गश्त के लिए रवाना किया गया था। शिविर से 2 किमी दूर ग्राम चिन्नाकोडेपाल के समीप जंगल में माओवादियों के बिछाए प्रेशर बम में स्निफर डाग क्रेकर का पैर पड़ने पर विस्फोट हो गया। धमाके में क्रेकर मौके पर ही शहीद हो गया, वहीं सीआरपीएफ का आरक्षक भानुप्रकाश रेड्डी गंभीर रूप से जख्मी हो गया है।

भानुप्रकाश को बीजापुर जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया है, भानु के हाथ में चोटें आयी हैं। उन्होंने बताया कि विस्फोट के बाद पुलिस पार्टी सुरक्षित लौट आयी है।

एक अधिकारी ने बताया कि ‘क्रेकर’ को दिसंबर 2015 में सीआरपीएफ बटालियन में शामिल किया गया था। क्रेकर बेल्जियन शेफर्ड (मैलिनोइस) नस्ल का कुत्ता था।

क्रेकर को बंदूकों की सलामी दी गई

क्रेकर को आज राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई। बल के शीर्ष अधिकारी ने उसके शव पर पुष्प चक्र अर्पित किया और फिर उसे कंधा दिया गया। इसके बाद बंदूकों की सलामी के बीच क्रेकर के शव को दफना दिया गया।

नस्ल की विशेषता

इस नस्ल के कुत्तों को विस्फोटक, आग्नेय सामग्री, नशीले पदार्थ सूंघने में तो महारत हासिल होती ही है, ये पीछा करने में भी माहिर होते हैं। भीड़ में घिरे संदिग्ध व्यक्तियों की तलाश का हुनर भी इस नस्ल के पास है। खोजी और राहत अभियान में भी आपदा दल इनका इस्तेमाल करते हैं।

इस नस्ल की खासियत का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि अमेरिकी खुफिया एजेंसी इस नस्ल के कुत्तों को अमेरिकी राष्ट्रपति के निवास व्हाइट हाउस के पहरेदारी में इन्हें तैनात करती है।

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