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माओवादी जंगलों में कहां छिपे हैं? बताएगा यह यंत्र

जगदलपुर: सुकमा में सीआरपीएफ के 25 जवानों की शहादत के बाद अब केंद्र सरकार माओवादियों पर चौतरफा हमले की योजना बना रही है। इसी योजना के तहत हाल ही में हुई सुरक्षा प्रमुखों की बैठक में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए-NSA) अजीत डोभाल ने माओवादियों पर नजर रखने व उनके खिलाफ चलाए जाने वाले ऑपरेशन में इजरायली रडार का उपयोग करने पर जोर दिया है।





एनएसए डोभाल के विचार पर गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने भी सहमति जताई है। इजरायली रडार का काम घने जंगलों के बीच माओवादियों की हलचल को कैमरे में कैद करना और उसे सुरक्षा एजेंसियों तक पहुंचाना होता है उसके बाद आगे की रणनीति सुरक्षाबल बनाते हैं। इजरायल ने भी रडार की उपलब्धता को लेकर अपनी सहमति दे दी है। रडार की खासियत ये है कि बेहद घने जंगलों में जमीन पर होने वाली गतिविधियों का पता लगा सकता है साथ ही बेहद साफ तस्वीरें ले सकता है।

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रडार का कनेक्शन सीधे सेंट्रल मानीटरिंग कंट्रोल रूम से होगा जहां से माओवादी विरोधी आपरेशन चलाए जाएंगे। माओवाद ग्रस्त क्षेत्रों में अलग-अलग स्थानों पर लगे रडार अपनी तस्वीरें इस कंट्रोल रूम को भेजेंगे जिसके आधार पर नक्सल विरोध आपरेशन की रूपरेखा तय की जाएगी। माना जा रहा है कि 8 मई को गृह मंत्रालय द्वारा आहूत बैठक में इस प्रस्ताव को अंतिम मंजूरी दे दी जाएगी।

सुकमा व बस्तर में हो रहे लगातार नक्सली हमले के बाद अब राज्य सरकार ही नही केंद्र सरकार भी देश की आंतरिक सुरक्षा को लेकर बेहद सक्रिय हो गया है। सुकमा हमले के बाद सुरक्षा विभाग से जुड़े अधिकारियों के बीच बुधवार को हुए मंथन में इस बात पर जोर दिया गया कि जिस तरह प्रमुख आतंकी संगठनों पर नजर रखने के लिए अमेरिका समेत अन्य देश जिस इजरायली रडार का उपयोग करते हैं। भारत में भी माओवादी गतिविधियों पर इस रडार के माध्यम से नजर रखी जाए।

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