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…माओवादियों ने ऐसे रची थी हमले की साजिश

सुकमा: एक बार फिर से छत्तीसगढ़ के सुकमा में माओवादी और सुरक्षाबलों के बीच मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 25 जवान शहीद हो गए और सात जवान घायल हुए हैं। मुठभेड़ के बाद यह बात निकलकर आई है कि माओवादियों ने इस हमले की साजिश एक सप्ताह पहले ही रच ली थी। जहां जवानों पर हमला किया गया यहां माओवादियों ने जवानों के लिए पहले से ही एंबुश लगा रखा था। जवानों को ट्रैप करने के लिए माओवादियों ने कई दिनों पहले ही षड्यंत्र रच लिया था, लेकिन वे सही समय और मौके के इंतजार में थे।





सुकमा में माओवादियों से मुठभेड़, सीआरपीएफ के 26 जवान शहीद

पहले ब्लास्ट किया फिर फायरिंग

आज जैसे ही सीआरपीएफ के जवान माओवादियों के एंबुश की जद में आए नक्सलियों ने जबरदस्त बारूदी सुरंग विस्फोट कर दिया। इससे पहले जवान कुछ समझ पाते कि झाड़ियों के पीछे छिपे लगभग 300 हथियारबंद नक्सलियों ने उन पर फायरिंग शुरू कर दी।

मिलिट्री बटालियन ने घटना को अंजाम दिया

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, इस घटना को माओवादियों की मिलिट्री बटालियन की कंपनी नंबर-1 ने अंजाम दिया है और इसका नेतृत्व नक्सली नेता सीटू ने किया। इस इलाके की पूरी कमान वैसे तो हिड़मा के हाथों में है और हिड़मा ही इलाके में लीड करता है लेकिन इसके अलावा अर्जुन और सीटू उर्फ सोनू भी यहां सक्रिय हैं।

आसपास कैम्पों के बावजूद एंबुश में फंसे जवान

बुरकापाल के निकट जिस स्थान पर जवान नक्सलियों के एंबुश में फंसे थे, उसके आसपास सुरक्षा बलों के कई कैंप हैं। बताया जा रहा है कि यहां हर पांच किमी पर एक कैंप है। ऐसे में नक्सलियों ने चिंतागुफा थाने से महज डेढ़ किलोमीटर दूर ही जवानों को फंसाने के लिए एंबुश लगाया था।

कल लाए जाएंगे शहीदों के शव

मुठभेड़ स्थल धुर नक्सल प्रभावित दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र है और अंधेरा घिर आया है इसलिए फिलहाल शहीदों के शव को लाना सुरक्षा के दृष्टिकोण से संभव नहीं है। इस स्थल पर हेलिकॉप्टर उतारना भी संभव नहीं है। इसलिए जवानों के शव कल लाए जाएंगे।

25 जवानों के शहादत की पुष्टि

बस्तर डीआईजी पी सुंदरराज एवं सुकमा एसपी अभिषेक मीणा ने बताया कि मुठभेड़ में सीआरपीएफ के 74वीं बटालियन के 25 जवान शहीद हुए हैं। साथ ही चार जवान गंभीर रूप में जख्मी हो गए हैं। घायल जवानों को हेलिकाप्टर से रायपुर रेफर किया गया है। उन्होंने बताया कि मुठभेड़ स्थल पर मौजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्य, खून के धब्बे एवं घसीटे जाने के निशान से यह साबित होता है कि कम से कम चार-पांच नक्सली भी मारे गए हैं और कई लहूलुहान हुए हैं, साथियों के शव नक्सली अपने साथ ले जाने में कामयाब रहे।

भाग खड़े हुए माओवादी

पुलिस सूत्रों के अनुसार चिंतागुफा थाने से संयुक्त पुलिस बल गश्त सर्चिंग के लिए रवाना हुआ था। ग्राम बुरकापाल के समीप पहाड़ी में घात लगाए माओवादियों ने पुलिस पर फायरिंग शुरू कर दी। जवाबी कार्रवाई में पुलिस ने भी फौरन मोर्चा संभालते हुए गोलीबारी की। लगभग 2 घंटे की मुठभेड़ के बाद अंतत: माओवादी जंगल और पहाड़ी की आड़ लेकर भाग गए।

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