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नक्सलियों का सफाया किए बिना न लौटना…

सुकमा हमला

नई दिल्ली। “माओवादियों की निर्ममता अब बर्दाश्त के बाहर है। बहुत हो गया। हमें एक करोड़ का मुआवजा नहीं खून का बदला खून से चाहिए।” यह बात किसी नेता ने नहीं कही है बल्कि आईटीबीपी (ITBP) के इन्स्पेक्टर प्रमोद तिवारी ने अपना गुस्सा और दर्द एक वीडियो के जरिए देश के सामने रखा है। कवि ह्रदय प्रमोद के अन्दर सुकमा में 24 अप्रैल को सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के 25 जवानों की शहादत को लेकर बहुत पीड़ा है जो उन्होंने रोते हुए बयां की है। प्रमोद का दर्द और जज्बा किसी को भी अन्दर तक भेद सकता है।





सूत्रों ने rakshaknews.com को बताया कि प्रमोद इस समय छत्तीसगढ़ के नारायनपुर बेस में तैनात हैं। दरअसल, छत्तीसगढ़ में ITBP के चार जगह बेस हैं। नारायनपुर इनमें से एक बेस है। प्रमोद का वीडियो मेजर गौरव आर्या के ट्विटर एकाउंट से आज सुबह करीब सात बजे वायरल हुआ था।

प्रमोद ने वीडियो में क्या कहा

“मैं एंटी नक्सल ऑपरेशन में लगे सभी जवानों और अफसरों से गुजारिश करता हूं कि अब बहुत हो गया। जिस खुशी के लिए हम लोग कई दिनों तक जंगलों में रहते हैं। खाना नहीं मिलता है, मोबाइल नेटवर्क नहीं मिलता है। जिस मां-बाप और बच्चों की खुशी के लिए हम काम करते हैं, उन्हीं से कई दिन तक बात नहीं हो पाती है। उनका चेहरा तक नहीं देख पाते हैं।”

आपके पास यूनिफॉर्म और हथियार हैं। ये लड़ाई कोई सरकार, समाज या संविधान की नहीं। अगर तीनों की होती, तो कब की खत्म हो जाती। चार दिन मीडिया पर डिबेट चलती है बस। बहुत हो गया, अब बर्दाश्त मत करो। सभी जवान और अफसरों को ये कसम खानी होगी कि जब तक हम जवानों का बदला नहीं ले लेते, वहां से नहीं जाएंगे। जब मर ही रहे हैं, तो मारकर मरेंगे।”

“हमें ट्विटर, फेसबुक या वाट्सऐप के जरिए सहानुभूति नहीं चाहिए। हमको अपने जवान के खून का बदला खून से लेना चाहिए। नहीं चाहिए एक करोड़ का मुआवजा। कोई भी पैसा देकर सेलिब्रिटी बन जाता है, लेकिन उस मां से मिलने कोई नहीं गया, जिसने अपना बेटा खो दिया है। करीब 3 हजार सैनिक लगे हैं, उस रोड को बनवाने के लिए। मेरी आप लोगों से अपील है कि ये लड़ाई अब आपकी है। इसे अपने दिमाग से लड़िए।”

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