CRPF

नहीं लिया सबक, CRPF पर सुकमा में यह पांचवां बड़ा हमला

नई दिल्ली: अतीत से सबक न लेने का अक्सर खामियाजा भुगतना पड़ता है। माओवाद से बुरी तरह प्रभावित छत्तीसगढ़ का सुकमा जिला एक बार फिर CRPF के लिए कहर बन गया। माओवादियों ने सुरक्षाबलों को निशाना बनाते हुए बड़ा हमला किया है। इस हमले में सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन के 12 जवान शहीद हुए हैं और कई जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। बात यदि सिर्फ सिर्फ सुकमा जिले की करें तो सुकमा में 2006 से अब तक 5 बड़े हमले माओवादियों ने किए हैं, जिसमें 45 सुरक्षाबलों के जवान (पुलिस, सीआरपीएफ, एसटीएफ) और 24 आम लोग मारे गए हैं।





सीआरपीएफ के शहीद हुए जवानों की लिस्ट देखने के लिए यहां क्लिक करें

आदिवासी बहुल जिला सुकमा राष्ट्रीय राजमार्ग 30 के जरिए जगदलपुर से जुड़ा हुआ है। छत्तीसगढ़ के दक्षिण में ओडिशा के मलकानगिरी जिले और आंध्र प्रदेश के साथ जिला सीमाओं से लगा हुआ है। 1 जनवरी 2012 को दंतेवाड़ा जिला से काटकर सुकमा जिले का गठन किया गया था। सुकमा अति प्रभावित जिलों में से एक है। यहां जंगल अधिक हैं और माओवादी जंगलों का फायदा उठाकर बड़ी घटनाओं को अंजाम दे जाते हैं। सुकमा जिला दंतेवाड़ा, बस्तर, और बीजापुर से घिरा है। ये जिले भी अति प्रभावित में से हैं। दूसरी तरफ, आंध्र प्रदेश और ओडिशा से भी माओवादी सुकमा के जंगलों में आसानी से प्रवेश कर जाते हैं।

छत्तीसगढ़ में फिर माओवादी हमला, CRPF के 12 जाबांज जवान शहीद, हथियार भी लूटे 

ऐसा अक्सर देखने को मिला है कि छत्तीसगढ़ में माओवादी राज्य की मिट्टी को लाल करते रहे हैं। उनके निशाने पर सुरक्षाबलों के साथ-साथ जनप्रतिनिधि, अधिकारी और आम लोग भी रहते हैं।

छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने कब-कब बड़ी घटनाओं को अंजाम दिया

2017

  • 11 मार्च 2017 को छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले के भेज्जी क्षेत्र में माओवादियों ने उस समय सीआरपीएफ की टीम पर हमला किया जवान इस इलाके में अवरुद्ध सड़क को खाली कराने के काम में जुटे थे। इस नक्सली हमले में सीआरपीएफ के 12 जवान शहीद हुए हैं। माओवादियों ने जवानों के हथियार और रेडियो सेट्स भी लूट लिए। शहीद हुए जवान सीआरपीएफ की 219वीं बटालियन से थे।

2016

  • 30 मार्च 2016 को दंतेवाड़ा में माओवादियों ने सीआरपीएफ जवानों पर हमला किया था। इसमें 7 जवान शहीद हुए।

2015

  • 11 अप्रैल 2015 सुकमा के कंकेरलंका में माओवादियों ने स्पेशल टास्क फोर्स (STF) पर हमला किया था। इस हमले में एसटीएफ के सात जवानों की मौत हुई थी।
  • 12 अप्रैल 2015 को कांकेर जिले के बांदे में एक बीएसएफ जवान की नक्सलियों ने हत्या कर दी थी।
  • 13 अप्रैल 2015 छत्तीसगढ़ आर्म्ड फोर्स के 5 जवान शहीद हुए थे। यह हमला माओवादियों ने दंतेवाड़ा जिले के किरनदुल में किया था।

2014

  • 28 फरवरी 2014 को छत्तीसगढ़ में माओवादियों ने एक थानाध्यक्ष समेत 6 पुलिसकर्मियों की हत्या कर दी थी।
  • 11 मार्च 2014 को सुकमा के दरभा घाटी के समीप टोंगपाल गांव में माओवादियों ने सुरक्षाबलों पर हमला किया था। इस हमले में 15 जवान शहीद हुए थे और एक आम नागरिक की भी मौत हुई थी।
  • 11 मई 2014 को गढ़चिरौली जिले में माओवादियों ने लैंडमाइन्स के जरिए 7 पुलिस कमाडों की हत्या कर दी थी।

2013

  • 25 मई 2013 को बस्तर के दरभा घाटी में हुए इस माओवादी हमले में आदिवासी नेता महेंद्र कर्मा, कांग्रेस पार्टी के प्रदेशाध्यक्ष नंद कुमार पटेल, पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल समेत 30 से अधिक लोग मारे गए थे।

2012

  • नवंबर: पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा के वाहन पर हमला।
  • 12 मई: सुकमा में दूरदर्शन केंद्र पर हमला, चार जवान शहीद।
  • मई: तत्कालीन महिला और बाल विकास मंत्री लता उसेंडी के वाहन पर हमला।
  • अप्रैल: संसदीय सचिव महेश गागडा के काफिले पर हमला।
  • जनवरी: विधायक भीमा मंडावी के काफिले पर हमला।

2011

  • अक्टूबर: भाजपा विधायक डमरूधर पुजारी के घर पर हमला।
  • अक्टूबर:बस्तर में छह सुरक्षाकर्मियों की हत्या।
  • अगस्त: माओवादी हमले में 11 पुलिसकर्मियों की हत्या।
  • जुलाई: दंतेवाडा में 10 पुलिसकर्मियों की हत्या।
  • जुलाई: कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल के काफिले पर हमला।

2010

  • 29 जून 2010 को नारायणपुर जिले के धोड़ाई में सीआरपीएफ के जवानों पर माओवादियों ने हमला किया। इस हमले में पुलिस के 27 जवान मारे गए।
  • 17 मई 2010 को एक यात्री बस में सवार होकर दंतेवाड़ा से सुकमा जा रहे सुरक्षाबल के जवानों पर माओवादियों ने बारूदी सुरंग लगा कर हमला किया था, जिसमें 14 विशेष पुलिस अधिकारी समेत 36 लोग मारे गए थे।
  • 6 अप्रैल 2010 को बस्तर के ताड़मेटला में सीआरपीएफ के जवान सर्चिंग के लिए निकले थे, जहां संदिग्ध माओवादियों ने बारुदी सुरंग लगा कर 76 जवानों को मार डाला था।

2009

  • 12 जुलाई 2009 को राजनांदगांव के मानपुर इलाके में माओवादियों के हमले की सूचना पा कर पहुंचे पुलिस अधीक्षक विनोद कुमार चौबे समेत 29 पुलिसकर्मियों पर माओवादियों ने हमला बोला और उनकी हत्या कर दी।
  • 26 सितंबर 2009 को भाजपा सांसद बलिराम कश्यप की जगदलपुर में हत्या।

2008

  • मार्च में सांसद बलिराम कश्यप और वनमंत्री विक्रम उसेंडी के काफिले पर हमला।
  • 28 अप्रैल: कांकेर के मिचगांव में मोर्टार बम से हमला कर नक्सलियों ने पांच जवानों की हत्या कर दी थी।
  • 16 मार्च: रानी बोदली के जंगल में हंड ग्रेनेड, गैसोलीन बम और बंदूक से हमला कर नक्सलियों ने करीब 49 लोगों की हत्या कर दी थी।

2007

  • 9 जुलाई 2007 को एर्राबोर के उरपलमेटा में सीआरपीएफ और ज़िला पुलिस का बल माओवादियों की तलाश कर के वापस बेस कैंप लौट रहा था। इस दल पर माओवादियों ने हमला बोला जिसमें 23 पुलिसकर्मी शहीद हुए थे।
  • 15 मार्च 2007 को बीजापुर के रानीबोदली में पुलिस के एक कैंप पर आधी रात को माओवादियों ने हमला किया और भारी गोलीबारी की। इसके बाद कैंप को बाहर से आग लगा दिया. इस हमले में पुलिस के 55 जवान मारे गए।
  • 17 जुलाई 2007 करीब 800 माओवादियों ने दंतेवाडा में हमला कर 25 लोगों की हत्या की, इस हमले में 32 लोग घायल हुए थे और करीब 250 लोग लापता हो गए थे।

2006

  • 9 फरवरी 2006 को नक्सलियों ने एनएमडीसी के गोदाम में हमला कर सीआरपीएफ के 8 जवानों की हत्या कर गोदाम से बारूद लूट लिए थे।

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