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ये है सुकमा में CRPF जवानों पर हमले का मास्टरमाइंड

नई दिल्लीः सुकमा में सीआरपीएफ जवानों पर हुए हमले को अंजाम देने वाले मुख्य साजिशकर्ता की पहचान कर ली गई है। इसका नाम है हिडमा और यह माओवादियों का कमांडर है। 11 मार्च में सुकमा के भेजी में सीआरपीएफ के जवानों पर हमले में भी हिडमा शामिल था। उस बार 12 जवान शहीद हुए थे।





खुफिया विभाग के मुताबिक, हिडमा की लोकेशन का अभी तक सही-सही पता नहीं चल पया है क्योंकि, वह बार-बार इन इलाकों में अपनी पोजीशन बदलता रहता है। खुफिया एजेंसियों के मुताबिक ओडिशा और आंध्र प्रदेश की सीमा के नजदीक होने के कारण नक्सली हमलों को अंजाम देने के बाद आसानी से दूसरे राज्यों में जाकर छिप जाते हैं इसलिए पकड़ में नहीं आते।

हिडमा के बारे में

मडवी हिडमा उर्फ हिडमन्ना! इसकी उम्र मात्रा 25 साल है और वह काफी समय से माओवादी मूवमेंट में सक्रिय है। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक वह सुकमा में जंगरगुंडा इलाके के पलोडी गांव का रहने वाला है। इस इलाके में उसे हिडमालु, और संतोष के नाम से भी जाना जाता है। पिछले एक दशक से वह सक्रिय है और उस पर पुलिस ने 25 लाख रुपए का इनाम भी रखा है।

हिडमा (फाइल फोटो)

माना जाता है कि गुरिल्ला लड़ाई में उसे महारत हासिल है। यही वजह है कि उसे पीपुल्स लिबरेशन गुरिल्ला आर्मी (पीएलजीए) की बटालियन-1 का कमांडर बनाया गया है। इस बटालियन के तहत नक्सलियों की तीन यूनिट काम करती हैं। ये बटालियन सुकमा और बीजापुर में सक्रिय है, इसके अलावा हिडमा माओवादियों की दंडकारण्य स्पेशल जोनल कमेटी (डीकेएसजेडसी) का भी सदस्य है। हाल ही में सुकमा से कनाडा के एक सैलानी को अगवा करने के पीछे भी हिडमा का ही हाथ बताया जाता है।

सितंबर, 2016 में पहली बार एके-47 के साथ उसकी तस्वीर सामने आयी थी। बताया जाता है कि सुकमा के पलोडी गांव का हिडमा साउथ जोनल कमेटी का सदस्य बननेवाला बस्तर का पहला माओवादी है। ताड़मेटला कांड के समय वह कंपनी का नंबर एक कमांडर था। उसकी रणनीति से खुश होकर शीर्ष नेताओं ने कंपनी में नंबर एक और तीन का विलय कर बटालियन नंबर एक बना दिया और उसकी बागडोर हिडमा को सौंप दी।

इन घटनाओं के पीछे हिडमा का हाथ

  • माना जाता है कि 2010 में चिंतलनार में हुए हमले के पीछे भी हिडमा का ही दिमाग था, इसमें 76 सीआरपीएफ जवान शहीद हुए थे।
  • 2013 में झीरम घाटी में कांग्रेसी नेताओं के काफिले पर हुए हमले में भी हिडमा शामिल था। इसमें पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्या चरण शुक्ल, कांग्रेस नेता महेंद्र कर्मा समेत 35 लोग मारे गए थे।

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