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CRPF के रिटायर्ड IG को एंट्री से रोका, अब बोले खेद है

टीएस ढिल्लों

नई दिल्ली। केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF-सीआरपीएफ) के सेवानिवृत्त महानिरीक्षक (IG) टीएस ढिल्लों को कनाडा में प्रवेश के लिए उस वक्त रोक दिया गया, जब वह अपनी पत्नी के साथ कनाडा के वैंकूवर हवाईअड्डे से बाहर आ रहे थे। उनकी पत्नी को तो जाने दिया गया लेकिन उन्हें न सिर्फ रोक लिया बल्कि सार्वजनिक रूप से अपमानजनक भाषा का भी प्रयोग किया जबकि 18 मई को जब वे विमान से उतरे तो आव्रजन अधिकारियों को कोई दिक्कत नहीं थी। हालांकि चंद घंटे के भीतर ही कनाडा के बार्डर कंट्रोल अधिकारियों और कनाडा उच्चायोग ने टीएस ढिल्लों को हुई असुविधा के खेद जता दिया। 67 वर्षीय ढिल्लों 40 साल की सेवा के बाद वर्ष 2010 में सीआरपीएफ से रिटायर हुए थे।





टीएस ढिल्लों ने बताया कि एयरपोर्ट से निकलने से ठीक पहले मुझे रोकने के बाद अगले सात घंटों तक पूछताछ जारी रखी गई और अपमानजनक भाषा में बात की। अधिकारियों ने कश्मीर, छत्तीसगढ़ और पंजाब को एक स्वतंत्र देश खालिस्तान कहा, उनके पासपोर्ट को जब्त कर लिया गया और उनसे कहा गया कि वह अपने रिश्तेदार के यहां रात बिता सकते हैं, लेकिन अगली सुबह उन पर कार्यवाही की जाएगी। 20 मई को उन्हें भारत की एक फ्लाइट से वापस भेज दिया।

वैंकूवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा

कनाडा के वैंकूवर हवाई अड्डे पर सीआरपीएफ के रिटायर्ड भारतीय आईजी टीएस ढिल्लों को कनाडा में प्रवेश नहीं करने दिया गया।

पत्नी के साथ एक आयोजन में शामिल होने गए थे टीएस ढिल्लों

टीएस ढिल्लों के अनुसार, ‘मैं एक फैमिली फंक्शन में हिस्सा लेने के लिए वैंकूवर हवाई अड्डे पर उतरा, लेकिन एयरपोर्ट पर कनाडा की बॉर्डर एजेंसी ने मुझे देश में प्रवेश नहीं करने दिया। मैंने बताया कि मैं भारतीय पुलिस फ़ोर्स सीआरपीएफ का एक रिटायर्ड आॅफिसर हूं। लेकिन उन्होंने मेरी एक न सुनी, उन्होंने मुझसे कहा कि मैंने एक ऐसे बल में सेवाएं दी हैं जो ‘मानवाधिकार उल्लंघनों’ में शामिल फोर्स है।’

कनाडा उच्चायुक्त ने व्यक्त किया खेद

इस मामले ने जब तूल पकड़ लिया तो विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गोपाल बागले ने कनाडा के समक्ष ये मामला रखा। उन्होंने सीआरपीएफ जैसे एक प्रतिष्ठित बल के प्रति इस प्रकार की प्रक्रिया को पूरी तरह अस्वीकार्य बताया। उधर, कनाडा के उच्चायुक्त नादिर पटेल ने एक बयान में कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल भारत में कानून और व्यवस्था को कायम रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। उन्होंने अपने बयान में कहा कि एयरपोर्ट पर टीएस ढिल्लों को दिए गए एक दस्तावेज में मौजूद भाषा भारत या सीआरपीएफ के प्रति कनाडा सरकार की नीति को जाहिर नहीं करती। उन्होंने टीएस ढिल्लों और उनके परिवार को हुई किसी भी प्रकार की असुविधा के लिए खेद व्यक्त किया है।

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