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‘शौर्य दिवस’ पर सम्मानित किए गए CRPF के जांबाज जवान

सीआरपीएफ

रांची। केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) ने रविवार को धुर्वा में अपने समूह केंद्र में समारोह के दौरान अधिकारियों, कर्मियों और शहीदों के रिश्तेदारों का सम्मान करके शौर्य दिवस मनाया। इस अवसर पर कई अधिकारियों और जवानों को वीरता पुरस्कार और प्रमाण पत्र सौंपे गए। कम से कम 27 सीआरपीएफ के कर्मियों को डायरेक्टर जनरल चक्र मिला जबकि एक जवान को आंतरिक सुरक्षा के लिए पदक प्रदान किया गया।





समारोह में सीआरपीएफ के महानिरीक्षक (आईजी) और मुख्य अतिथि संजय लठकर ने पिछले साल अगस्त में जम्मू और कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हुए कमांडेंट प्रमोद कुमार की प्रतिमा का अनावरण किया। प्रमोद का जन्म बिहार में बख्तियारपुर में हुआ था, लेकिन उन्होंने अपनी शिक्षा जामताड़ा जिले में पूरी की। वह सीआरपीएफ में एक सहायक कमांडेंट के तौर पर शामिल हुए थे। आईजी ने प्रमोद की विधवा नेहा त्रिपाठी और पांच अन्य शहीदों के रिश्तेदारों को भी सम्मानित किया।

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आईजी ने शहीद प्रमोद की विधवा नेहा त्रिपाठी को भी सम्मानित किया।

उधर बोकारो में केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) 26वीं वाहिनी के चास स्थित मुख्यालय में शौर्य दिवस मनाया गया। इस अवसर पर कमांडेंट अखिलेश कुमार सिंह ने गार्ड की सलामी ली और समस्त जवानों एवं वीरता पदक प्राप्त कार्मिकों को संबोधित करते हुए उनके वीरतापूर्ण कार्यों की सराहना की। साथ ही, कई जांबाज जवान सम्मानित भी किए गए।

वीरता हेतु राष्ट्रपति द्वारा पुरस्कृत श्रीनगर में आतंकियों से लोहा लेते हुए उन्हें मार गिराने वाले उपनिरीक्षक अवधेश चौधरी को, 9 नक्सलियों को मार गिराने वाले हवलदार मोहम्मद युसूफ, 26वीं वाहिनी द्वारा नक्सल अभियान के तहत मुठभेड़ में नक्सलियों को मार गिराने वाले और एक महिला नक्सली को हथियार समेत गिरफ्तार करने वाले सिपाही सुकेश महतो को सम्मानित किया गया। इनके अतिरिक्त सीआरपीएफ के महानिदेशक ने वीरता के लिए प्रशंसा पदक पाने वाले सिपाही नागपाल व सिपाही राकेश कुमार को भी सम्मानित किया गया। शौर्य दिवस पर सम्मान समारोह के अलावा वाहिनी में रंगारंग कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।

उल्लेखनीय है कि शौर्य दिवस केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल के उन महान वीरों की कहानी है, जिन्होंने 9 अप्रैल, 1965 में पाकिस्तानी सेना की इन्फेन्टरी ब्रिगेड ने भारतीय सीमा चैकी पर हमला कर दिया जहां केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल की एक छोटी कम्पनी ने लोहा लेकर दृढ़तापूर्वक विरोध करते हुए और वीरतापूर्वक युद्ध करते हुए उनके सुनियोजित आक्रमण को निष्फल कर दिया।

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