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एम्स की दवाओं और देशवासियों की दुआओं ने बचा लिया सीआरपीएफ का चीता

नई दिल्ली: आखिरकार एम्स की दवाओं और देशवासियों की दुआओं ने बचा लिया देश का चीता। सीआरपीएफ की 45वीं बटालियन के कमांडिंग ऑफिसर जांबाज चेतन चीता की हालत अब निरंतर बेहतर हो रही है। जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी भी मिल सकती है। उन्हें गुरुवार को आईसीयू से जनरल वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया है। वह लगभग 25 दिनों तक आईसीयू में रहे और उन्हें जीवन रक्षक प्रणाली (वेंटीलेटर) पर भी रखा गया था, लेकिन 5 दिन से वह बिना वेंटीलेटर के थे।





एम्स के प्रवक्ता डॉक्टर अमित गुप्ता ने बताया कि, अब चेतन चीता होश में आ गए हैं और अपनी आंखें खोल रहे हैं, उन्हें भूख भी लगने लगी है। हालांकि, उन्हें अभी ट्यूब के जरिए ही आहार दिया जा रहा है। ट्यूब लगी होने की वजह से वह अभी बोल नहीं पा रहे हैं। उन्हें फिलहाल तरल पदार्थ खाने में दिया जा रहा है। उनकी सेहत जैसे-जैसे ठीक होगी उनका आहार बढ़ाया जाएगा।

डॉक्टर गुप्ता ने यह भी जानकारी दी कि हड्डियों से जुड़ी उनकी कुछ और सर्जरी की जा सकती है, लेकिन इसके बारे में बाद में फैसला लिया जाएगा।

आपको बता दें कि 14 फरवरी 2017 को चेतन चीता आतंकवादियों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गये थे। उत्तर-कश्मीर के बांदीपोर जिले के हाजिन सेक्टर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में 9 गोली लगने के बाद भी चेतन चीता ने हार नहीं मानी और गोली लगने के बाद भी आतंकियों से लड़ते रहे। इस ऑपरेशन में सेना के तीन जवान शहीद हो गए थे, जबकि चेतन चीता समेत चार जवान घायल हुए थे। उन्हें एयर एंबुलेंस से श्रीनगर से दिल्ली में एम्स के ट्रॉमा सेंटर लाया गया था।

पूरी तरह छलनी होने और आंख में गोली लगने के बावजूद चेतन चीता ने 16 राउंड गोलियां चलाईं और लश्कर के खतरनाक आतंकी कमांडर अबू हारिस को ढ़ेर कर दिया। एम्स में उनका इलाज कर रहे डाॉक्टरों ने उनकी अबतक तीन सर्जरी की और उनके शरीर में लगी सभी 9 गोलियों को निकाला।

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