CRPF

बच्चों को पढ़ने दें कॉमिक्स, CRPF को जान सकेंगे

सीआरपीएफ

नई दिल्ली: अगर आप अपने बच्चों को कॉमिक्स पढ़ने से मना करते हैं तो आप अपनी आदत अब बदल लीजिए। क्योंकि, अब कॉमिक्स के जरिए केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) अपने जवानों की वीरगाथाओं को मार्केट में ला चुका है। इन किताबों को पढ़कर बच्चे न सिर्फ सीआरपीएफ के बारे में जान पाएंगे बल्कि फोर्स के प्रति उनका झुकाव भी बढ़ेगा।





सीआरपीएफ ने अपने वीर जवानों की कई किताबें कॉमिक्स के रूप में लांच की हैं। इनमें हॉट स्प्रिंग, जांबाज इलंगो, अयोध्या के सूरवीर, शूरवीर प्रकाश, सरकार पोस्ट: एक शौर्य गाथा, वीर भृगुनंदन, दिलेर दिव्यांशु मुख्य हैं। इन कॉमिक्स के जरिए बच्चे जवानों की वीरगाथा तो पढ़ेंगे ही साथ में आपको यह भी शिकायत नहीं रहेगी कि उनके बच्चे फालतू की चीजों में अपना समय नष्ट कर रहे हैं। कॉमिक्स में ऑपरेशन्स से जुड़ी सारी बाते बताई गई हैं।

‘अयोध्या के शूरवीर’

इस पुस्तक में 5 जुलाई 2005 को राम जन्मभूमि और बाबरी मस्जिद परिसर पर आतंकवादी हमले को विफल बनाने में सीआरपीएफ के अधिकारियों और जवानों के शौर्य का वर्णन है। परिसर की बाहरी बाधा को पार करते हुए 5 आतंकवादी आंतरिक बाधा की ओर बढ़ना चाहते थे। यहां पर सीआरपीएफ की 33वीं बटालियन की टुकड़ियां तैनात थीं, आतंकवादियों ने गर्भगृह को उड़ाने के इरादे से सीआरपीएफ के जवानों पर भारी हमला किया, हथगोले गिराए और रॉकेट दागे, लेकिन सीआरपीएफ के जवानों ने बदले की जोरदार और बहादुरीपूर्ण कार्रवाई करते हुए पांचों आतंकवादियों को एक घंटे की लड़ाई में मार गिराया।

अयोध्या में मारे गए आतंकवादियों के पास से हथियार और गोला बारुद बरामद हुआ था। असाधारण बहादुरी और शौर्य के लिए सीआरपीएफ के 20 अधिकारियों और जवानों को शौर्य पदक दिए गए। इसमें दो शौर्य चक्र, 6 बहादुरी के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक तथा वीरता और पराक्रम के लिए 12 पुलिस पदक शामिल हैं।

‘वीर भृगुनंदन’

गया में नक्सलियों से मुठभेड़ की पूरी कहानी कॉमिक्स ‘वीर भृगुनंदन’ में है। भृगुनंदन चौधरी छत्तीसगढ़ के रहने वाले थे और इस मुठभेड़ में शहीद हो गए थे।

भृगुनंदन चौधरी 8 सितंबर 2012 को बिहार के गया और औरंगाबाद जिले के चकरबंधा जंगल में नक्सली मुठभेड़ में शहीद हो गए थे। करीब डेढ़ सौ नक्सलियों ने सुरक्षा बल की संयुक्त टुकड़ी पर आईईडी विस्फोट कर अंधाधुंध गोलीबारी की थी। इस हमले में भृगुनंदन बुरी तरह जख्मी हो गया था। कमर से नीचे तक का पूरा हिस्सा काम नहीं करने बाद भी भृगुनंदन ने आधा दर्जन नक्सलियों को मार गिराया था। बुरी तरह से घायल भृगुनंदन ने 8 दिसंबर 2012 को दम तोड़ दिया था। इसके लिए उन्हें मरणोपरांत सीरआरपीएफ ने कीर्तिचक्र प्रदान किया है।

‘सरदार पोस्ट: एक शौर्य गाथा’

सन 1965 में पाक के साथ हुई लड़ाई में अपनी जान पर खेलकर सीआरपीएफ के जवानों ने सरदार पोस्ट को बचाया था। 50 साल बाद सीआरपीएफ के जवानों की वीर गाथा घर घर पहुंचाने के लिए एक कॉमिक बुक रिलीज की गई। इसका नाम रखा गया है ‘सरदार पोस्ट एक शौर्य गाथा’। ऐसी ही कॉमिक बुक सेना अपने परमवीर चक्र विजेता पर निकाल चुकी है।

1965 में भारत-पाक युद्ध में सीआरपीएफ की दो कम्पनियों ने कच्छ के सरदार पोस्ट पर पाकिस्तान की एक पूरी इफेंट्री ब्रिगेड को भागने पर मजबूर कर दिया था। सीआरपीएफ के जवानों के जोरदार हमले से पाकिस्तानी अपने 34 सैनिकों को छोड़कर भाग गए थे। इस हमले में 4 पाकिस्तानी सैनिकों को पकड़ लिया गया था जबकि सीआरपीएफ के 6 जवान शहीद हो गए थे।

Comments

Most Popular

To Top