CRPF

…जब शरीर पर 9 गोलियां झेलने वाला चीता बोला, आई एम रॉकिंग

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नई दिल्ली। कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेते हुए घायल हुए CRPF के 45 वर्षीय कमांडेंट चेतन चीता आज (बुधवार) एम्स ट्रॉमा सेंटर से डिस्चार्ज हो गए हैं। उन्हें नौ गोलियां लगी थीं जिसके बाद उन्हें 14 फरवरी को दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया था। एम्स से डिस्चार्ज होने पर चेतन चीता ने एक ही वाक्य कहा, आई एम रॉकिंग। चेतन राजस्थान के कोटा जिले के खेल्दी गाँव के रहने वाले हैं। उन्होंने 1 जनवरी 1998 को असिस्टेंट कमांडेंट के रूप में सीआरपीएफ ज्वाइन की। माउंट आबू में ट्रेनिंग पूरी करने के बाद उन्होंने कई मोर्चों पर देश की सेवा की। इसमें 206 COBRA बटालियन में बतौर कमांडो उनका कार्यकाल भी शामिल है।





मौत को मात देकर एम्स से चीता पहुंचे घर, उठ खड़े हुए, रिजिजू ने कहा- चमत्कार…!

कमांडेंट चेतन चीता

कमांडेंट चेतन चीता घर पहुँचने पर आरती उतारे जाने के दौरान

चेतन चीता को लगी 9 गोलियां और जानें उनसे जुड़ी 9 खास बातें

  1. आतंकवादियों से मुठभेड़ में शरीर पर 9 गोलियां लगने और दो महीने तक कोमा में रहने के बाद CRPF के जांबाज कमांडेंट चेतन चीता अब बिल्कुल फिट हैं।
  2. बुधवार को राजधानी के ऑल इंडिया इंस्टिट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (AIIMS) से उन्हें छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों ने बताया कि चीता अपनी मजबूत इच्छाशक्ति के चलते मौत के मुंह से लौट आए।
  3. 14 फरवरी को जम्मू और कश्मीर के बांदीपुरा में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में चीता के बुरी तरह घायल हो जाने के बाद अब उनके स्वस्थ होकर घर लौटने को किसी चमत्कार से कम नहीं माना जा रहा है।
  4. 45 वर्षीय चीता की पत्नी उमा सिंह ने भी बताया कि उनकी हालत में सुधार हो रहा है और अब वह ठीक महसूस कर रहे हैं। उमा ने कहा, ‘मुझे अपने पति पर गर्व है कि वह मौत से लड़कर वापस आए हैं।’
  5. उमा ने बताया कि चीता उन्हें रोज फोन किया करते थे लेकिन मुठभेड़ वाले दिन उन्होंने फोन नहीं किया जिससे उन्हें कुछ गलत होने का पूर्वाभास हुआ। उन्होंने कहा, ‘बाद में जब मैंने कंट्रोल रूम को फोन किया तो पता चला कि वह घायल हो गए हैं।’
  6. सुरक्षा बलों ने सर्च अभियान चलाया था लेकिन इस अभियान की जानकारी आतंकवादियों को पहले ही मिल गई थी इसलिए उन्होंने अपना ठिकाना बदल लिया था। चीता इस अभियान का नेतृत्व कर रहे थे।
  7. जब चीता आतंकियों के नए ठिकाने के पास पहुंचे तभी उन पर आतंकियों ने अंधाधुंध फायरिंग कर दी। चीता पर 30 राउंड गोलियां चलाई गईं जिनमें से 9 गोलियां उन्हें लगीं।
  8. घायल होने के बावजूद चीता ने आतंकियों पर फायरिंग जारी रखी और लश्कर के खूंखार आतंकी अबू हारिस को ढेर कर दिया।
  9. कमांडेंट चीता का इलाज करने वाले डॉक्टरों ने कहा कि उनके इलाज के लिए 100 से ज्यादा का स्टॉफ लगा हुआ था। डॉक्टरों ने बताया कि कमांडेंट चीता के आत्मविश्वास के चलते वह इतनी जल्दी अस्पताल से वापस लौट सके। उन्होंने बताया कि अमूमन ऐसे मामलों में मरीज को ठीक होने में दो महीनों से दो साल तक का समय लग जाता है।

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