CRPF

सीआरपीएफ के ‘चीता’ को अपनी बहादुरी का भान ही नहीं

नई दिल्ली: केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) की 45वीं बटालियन के कमांडेंट चेतन चीता को अपनी बहादुरी की कहानी याद नहीं आ रही है। जी हां! कश्मीर में आतंकियों से लोहा लेने के क्रम में घायल हुए चेतन चीता को ऑपरेशन से जुड़ी कोई बात याद नहीं है।





चेतन चीता हाल ही में एम्स से डिस्चार्ज होकर अपने घर पहुंचे। एक समाचार चैनल को दिए साक्षात्कार में चेतन चीता ने कहा कि उन्हें ऑपरेशन के बारे में सिर्फ इतनी ही जानकारी है कि उनकी बटालियन (45वीं बटालियन सीआरपीएफ) को आतंकियों के वहां होने की सूचना मिली थी। इस ऑपरेशन में लोकल पुलिस, राष्ट्रीय रायफल्स और सीआरपीएफ संयुक्त रूप से शामिल थी। इसके अलावा उन्हें ऑपरेशन से जुड़ी कोई बात याद नहीं है।

वहीं, चेतन चीता की पत्नी उमा सिंह ने बताया कि ऑपरेशन से एक दिन पहले चीता का उनके पास फोन आया था और इस तरह के ऑपरेशन की जानकारी दी थी। हालांकि, चीता ने अपनी पत्नी से फोन पर कहा था कि वह इस तरह के ऑपरेशन की ज्यादा जानकारी फोन पर नहीं दे सकते क्योंकि यह नियमों को खिलाफ भी है।

पत्थरबाजों पर ऐसे भड़की CRPF के ‘चीता’ की पत्नी

गौरतलब है कि 14 फरवरी 2017 को चेतन चीता आतंकवादियों के हमले में गंभीर रूप से घायल हो गये थे। उत्तर-कश्मीर के बांदीपोर जिले के हाजिन सेक्टर में आतंकियों के साथ मुठभेड़ में 9 गोली लगने के बाद भी चेतन चीता ने हार नहीं मानी और आतंकियों से लड़ते रहे। इस ऑपरेशन में सेना के तीन जवान शहीद हो गए थे, जबकि चेतन चीता समेत चार जवान घायल हुए थे। उन्हें एयर एंबुलेंस से श्रीनगर से दिल्ली में एम्स के ट्रॉमा सेंटर लाया गया था।

पूरी तरह छलनी होने और आंख में गोली लगने के बावजूद चेतन चीता ने 16 राउंड गोलियां चलाईं और लश्कर के खतरनाक आतंकी कमांडर अबू हारिस को ढ़ेर कर दिया। एम्स में उनका इलाज कर रहे डॉक्टरों ने उनकी अब तक तीन सर्जरी की और उनके शरीर में लगी सभी 9 गोलियों को निकाला।

Comments

Most Popular

To Top