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सीने पर तीन गोलियां खाने वाले सतवंत पहुंचे रिजर्व पुलिस से रिजर्व बैंक

इस दौरान को सतवंत सिंह के सीने में तीन गोलियां लगी। मौत उनके सामने खड़ी थी और सीने से लगातार खून बह रहा था बावजूद इसके वो अपने साथियों को बचाने और हालात से निबटने के लिए दिशा निर्देश देते रहे।

यदि आपको पता हो कि मौत अब आने ही वाली है तो सबसे पहले आप किसके बारे में सोचेंगे? सवाल अटपटा है लेकिन जवाब बहुत ही आसान। जाहिर है आपको सबसे पहले अपनों का, अपने परिवार का ख्याल आएगा लेकिन आज भारत के एक केंद्रीय मंत्री ने देश को उस शूरवीर से रूबरू करवाया जिसने मौत को सामने देखकर अपने परिवार नहीं बल्कि अपने घायल साथियों के बारे में पहले सोचा। इनका नाम है सतवंत सिंह। सतवंत सिंह न सिर्फ मौत को मात देने के लिए जूझते रहे बल्कि उन हालात से अपने साथियों को भी बाहर निकाल लाए।





इस शूरवीर का देशभक्ति और बहादुरी भरा वीडियो पूर्व आर्मी चीफ और केंद्रीय मंत्री जनरल वीके सिंह ने सोशल मीडिया पर जारी कर सबको हैरान कर डाला है।

वीडियो 8 जून 2009 का है जब छत्तीसगढ़ के बीजापुर जिले में स्थित टोड़का के जंगलों में गंगलूर थाना क्षेत्र में गश्त पर निकली सुरक्षाकर्मियों की टीम की नक्सलियों के साथ पांच घंटे तक मुठभेड़ चली। सीआरपीएफ और स्थानीय पुलिस की इस टीम को जंगल में नक्सलियों के छिपे होने की सूचना मिली थी| जैसे ही ये टीम सीआरपीएफ की 85वीं बटालियन के सहायक कमांडेंट सतवंत सिंह यादव के नेतृत्व में जंगल में घुसी वैसे ही गोलीबारी शुरू हो गई।

सतवंत सिंह यादव CRPF के अपने मित्र जे. राम के साथ मुंबई में मैराथन के दौरान

इस दौरान को सतवंत सिंह के सीने में तीन गोलियां लगी। मौत उनके सामने खड़ी थी और सीने से लगातार खून बह रहा था बावजूद इसके वह अपने साथियों को बचाने और हालात से निबटने के लिए दिशा निर्देश देते रहे। सतवंत के अलावा मुठभेड़ में सीआरपीएफ के एक हवलदार और एक सिपाही के साथ छत्तीसगढ़ पुलिस के दो जवान भी घायल हुए थे।

क्या हुआ इसके बाद?

जख्मी सतवंत सिंह इलाज के बाद ठीक तो हो गए लेकिन उनकी बहादुरी और सूझबूझ के लिए सरकार की तरफ से कोई बड़ा सम्मान या मेडल दिए जाने की कोई खबर नहीं है। अलबत्ता उन्हें स्वास्थ्य के आधार पर रिटायरमेंट लेना पड़ा। फिलहाल, सतवंत सिंह यादव मुंबई में भारतीय रिजर्व बैंक में काम कर रहे हैं।

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