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एक बेटा सुकमा में शहीद तो दूसरा सेना में जाने को तैयार

सुकमा हमला

मदुरै। सुकमा में सोमवार को माओवादियों के हमले में सीआरपीएफ के शहीद कांस्टेबल 28 साल के पी. अलागुपांडी के रिटायर्ड फौजी पिता पिचायअलागु अपने बेटे की मौत पर गर्व से कहते हैं कि मेरा दूसरा बेटा 23 साल का पवित्रन सेना में जाने को तैयार है। उसका चयन हो गया है। बस… आदेश आने का इंतजार है। अलागुपांडी का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान से उनके पैतृक गांव मुथुनगैयापुरम में किया गया। अलागुपांडी ने 20 साल की उम्र में 2009 में सीआरपीएफ ज्वाइन की थी। बता दें कि सुकमा हमले में शहीद हुए 25 जवानों में चार जवान तमिलनाडु के हैं।





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सीआरपीएफ के शहीद कांस्टेबल पी. अलागुपांडी को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी गई

अलागुपांडी के पिता अचानक यादों में खो जाते हैं। वह बताते हैं कि, ‘हम अलागुपांडी की शादी करने की सोच रहे थे और लड़की ढूंढ ली थी। कुछ दिन पहले उसने फोन करके कहा था कि एक हफ्ते की छुट्टी लेकर आऊंगा तो लड़की से मिल सकता हूं… हम जल्दी उसकी शादी की उम्मीद कर रहे थे।’ उन्होंने कहा कि सेना और देश की सेवा हमारी रगों में है। यहां तक कि मेरी बेटी सत्या की शादी फौजी से और नित्या की शादी पुलिस अधिकारी से हुई है।

… इस बहादुर मां ने शहीद बेटे के लिए क्या कहा?

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शहीद मनोज कुमार की फ़ाइल फोटो

जिस तरह एक पिता ने अपने बेटे की शहादत को गर्व से लिया, उसी तरह एक मां ने भी गर्व से कहा कि ‘अगर मेरे बेटे ने मरने से पहले 2-4 नक्सलियों को मार डाला होता तो उसकी शहादत का मकसद पूरा हो जाता।’ यह कहना है मुजफ्फरनगर के शहीद जवान मनोज कुमार की मां का। हालांकि मां का कहना है कि ‘इससे ज्यादा और क्या कह सकती हूं, मेरा कमाऊ पूत चला गया। भगवान अब मुझे भी अपने पास बुला ले।’ मनोज ने 2011 में सीआरपीएफ ज्वाइन की थी।

साभार : द न्यू इन्डियन एक्सप्रेस

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