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अदम्य साहस और वीरता के लिए BSF जवानों को प्रदान किये गए ‘पुलिस पदक’ जानें इनके पराक्रम की 14 कहानियां

मंगलवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित एक कार्यक्रम में ‘सीमा सुरक्षा बल’ यानी BSF के जवानों को उनके साहस, पराक्रम और वीरता तथा सराहनीय सेवाओं के लिए पुलिस पदक प्रदान किये  गए।





10 मार्च 1951  को शुरू किये गए ‘वीरता के लिए पुलिस पदक’  पुलिस बलों अथवा संगठित अग्निश्मन सेवा के उन सदस्यों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने अपनी ड्यूटी के दौरान  उल्लेखनीय ‘शौर्यपूर्ण सेवाएं’ दी हैं। इसी तरह ‘सराहनीय सेवा पुलिस पदक’ उन पुलिसकर्मियों को प्रदान किये जाते हैं जिनका सेवा रिकॉर्ड ‘ निरंतर उत्कृष्ट’ रहा हो। आइए जानते हैं ऐसे ही वीर, युद्धकौशल के धनी  जवानों और पुलिसकर्मियों के साहस की कहानियां :-

शहीद आदिल अब्बास (मुख्य आरक्षक) 98वीं बटालियन

पूर्वोत्तर राज्य त्रिपुरा के ‘नलकटा’ जिले में भारत-बांग्लादेश  अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर तैनात 98वीं बटालियन के इलाके में हो रही बॉर्डर तारबंदी और सड़क निर्माण कार्य के दौरान मुख्य आरक्षक आदिल अब्बास निर्माण कंपनी के वाटर टैंकर की सुरक्षा में नियुक्त थे।

17 नवंबर 2014 की सुबह 10 बजे, आतंकियों के फायर से मुख्य आरक्षक अब्बास सहित टैंकर चालक और सहचालक जख्मी हुए और गाड़ी क्षतिग्रस्त हो गई। आतंकवादी आगे बढ़ रहे थे, तभी अपने जख्मों की परवाह किये बगैर बहादुर आदिल ने आतंकवादियों के खिलाफ मोर्चा खोल उन्हें भागने पर मजबूर कर दिया। घायल आदिल को अगरतला के आई.एल.एस. हॉस्पिटल ले जाया गया जहां इस वीर प्रहरी को दिवंगत घोषित कर दिया गया।

दिवंगत मुख्य आरक्षक आदिल अब्बास के युद्धकौशल, साहस, सामरिक कार्रवाई और प्राणोत्सर्ग को कोटि-कोटि नमन करते हुए मुल्क ने सीमाओं के इस सच्चे सिपाही को सन् 2016 के स्वतंत्रता दिवस पर बलिदानोपरांत वीरता के लिये ‘पुलिस पद’ से नवाजा।

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