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EXCLUSIVE…! बीएसएफ की बैरक से कैसे फुटबालर बना यह मुख्यमंत्री

मणिपुर के नए मुख्यमंत्री बिरेन सिंह

इंफाल: नोंगथोमबम बिरेन सिंह ने मणिपुर के मुख्यमंत्री के तौर पर 15 मार्च 2017 को शपथ ग्रहण की। उन्हें यहां तक पहुंचने के लिए कड़ी मेहनत करनी पड़ी। उन पर आतंकियों के पक्ष में समाचार प्रेषित करने का आरोप भी लग चुका है। बिरेन सिंह पहले एक फुटबॉल खिलाड़ी थे। वह मणिपुर से अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर खेलने वाले पहले फुटबॉल खिलाड़ी थे। वह इतने अच्छे फ़ुटबालर थे कि बीएसएफ ने उस समय 18 साल के बिरेन को खेल कोटे से न सिर्फ नौकरी दी बल्कि अपनी फुटबॉल टीम को भी मजबूत बनाया। उन्होंने 14 साल तक बीएसएफ में नौकरी की और 32 साल की उम्र में 1993 में बीएसएफ की बैरक को अलविदा कह दिया। लेकिन इससे पहले उन्होंने बतौर फुटबालर कई उपलब्धियां व्यक्तिगत और टीम स्तर पर हासिल कीं।





बिरेन सिंह

बिरेन के लिए बतौर फुटबालर 1981 का साल बेहद गौरवपूर्ण रहा। इस साल दिल्ली के अम्बेडकर स्टेडियम में खेले गए प्रतिष्ठित डूरंड कप टूर्नामेंट के फाइनल में बीएसएफ जलंधर ने जेसीटी को जबरदस्त मुकाबले में 1-0 से हरा दिया था।

बिरेन सिंह

ट्राफी और टीम के साथ बिरेन

बिरेन सिंह

1981 में दिल्ली के अम्बेडकर स्टेडियम में खेले गए प्रतिष्ठित डूरंड कप टूर्नामेंट के फाइनल में एक्शन में बिरेन

बिरेन सिंह

बिरेन ने 1981 में NEROCA (North eastern reorganizing cultural association) FC क्लब के लिए भी फ़ुटबाल पर खूब किक लगाई

बिरेन के लिए बतौर फुटबालर 1981 का साल बेहद गौरवपूर्ण रहा। इस साल दिल्ली के अम्बेडकर स्टेडियम में खेले गए प्रतिष्ठित डूरंड कप टूर्नामेंट के फाइनल में बीएसएफ जलंधर ने जेसीटी को जबरदस्त मुकाबले में 1-0 से हरा दिया था। इस मैच की अहमियत का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उस समय राष्ट्रपति नीलम संजीव रेड्डी पूरे मैच के दौरान मौजूद रहे। शुरुआत में उन्होंने सभी खिलाड़ियों से परिचय प्राप्त किया तो मैच के बाद विजेता टीम यानि बिरेन की बीएसएफ जलंधर को ट्राफी प्रदान कर ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। ये फोटो ‘रक्षकन्यूज.काम’ ने ख़ासतौर से मणिपुर के मुख्यमंत्री के परिवार से हासिल की हैं। बिरेन कोई हल्के-फुल्के खिलाड़ी नहीं थे यह तो उन्होंने मणिपुर की सत्ता हासिल करके जता दिया है। उन्होंने 1981 में NEROCA (North eastern reorganizing  cultural association) FC क्लब के लिए भी फ़ुटबाल पर खूब किक लगाई है।

बीएसएफ में बिरेन सिंह ने ज्यादा दिन तक सेवा नहीं की। उन्होंने इस्तीफा देकर पत्रकारिता शुरू कर दी। उन्होंने पत्रकार के तौर पर क्षेत्रीय समाचार पत्र ‘नाहरोल जी थुआंग’ से नई पारी की शुरुआत की। उन्होंने अखबार चलाने के लिए पिता से विरासत में मिली दो एकड़ जमीन बेच दी थी, मगर राजनीति में आने के लिए उन्होंने साल 2001 में ही अपना अखबार दो लाख रुपये में बेच दिया था। बतौर बिरेन सिंह उन्होंने अपनी अंतरात्मा की आवाज पर लोगों की सेवा के लिए पत्रकारिता छोड़ दी, जिससे वह बहुत प्यार करते थे।

पत्रकारिता से राजनीति तक का सफर

  • 2000 में बिरेन के प्रेस पर पुलिस ने छापा मारा। उन पर राजद्रोह का आरोप लगाया गया। अधिकारियों ने उन पर आतंकियों के समर्थन में समाचार छापने का आरोप लगाया। उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया।
  • उन्होंने अपना रास्ता बदलने का फैसला किया और राजनीति में घुस गए।
  • उन्होंने 2002 में डेमोक्रेटिक रिवोल्यूशनरी पार्टी के टिकट पर विधानसभा का चुनाव लड़ा और जीते। इसके बाद से उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
  • बिरेन सिंह मई 2003 में कांग्रेस में शामिल हुए और मंत्री बने। वह बाद के चुनावों में भी अपनी सीट से जीतते रहे।
  • राज्य में महत्वपूर्ण मंत्रालय संभालते हुए वह मणिपुर सरकार के प्रवक्ता बने रहे। उन्हें मुख्यमंत्री इबोबी सिंह के संकटमोचक के तौर पर देखा जाने लगा।
  • उन्होंने जल्द ही इबोबी सिंह के खिलाफ विद्रोह कर दिया।
  • इबोबी सिंह ने बीते साल बिरेन सिंह को बर्खास्त कर दिया।
  • बिरेन सिंह ने कांग्रेस और विधानसभा से इस्तीफा दे दिया।
  • 17 अक्टूबर, 2016 को भारतीय जनता पार्टी में शामिल हो गए।
  • 15 मार्च 2017 को मणिपुर के मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली।

2017 में मणिपुर चुनाव की दलीय स्थिति

  • कुल सीटें-60
  • कांग्रेस को 28 सीटें
  • बीजेपी को 21 सीटें
  • नेशनल पीपुल्स पार्टी को 4 सीटें
  • नगा पीपुल्स फ्रंट को 4 सीटें
  • जनशक्ति पार्टी को 1 सीट
  • टीएमसी को 1 सीट

ऐसे मिला बीजेपी को बहुमत

मणिपुर में 60 सीटें हैं, जिसमें बहुमत के लिए 31 सीटें चाहिए। बीजेपी के पास कुल 21 सीटें हैं। नगा पीपुल्स फ्रंट (एनपीएफ) के चार, नेशनल पीपुल्स पार्टी (एनपीपी) के चार, लोक जनशक्ति पार्टी और टीएमसी के 1-1 विधायक ने बीजेपी के साथ जुड़ने का फैसला किया और समर्थन देने का ऐलान किया। इसके अलावा कांग्रेस पार्टी के एक विधायक ने भी बीजेपी को समर्थन का ऐलान किया।

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