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… जब मां ने शहीद बेटे को कंधे पर उठाकर दी अंतिम विदाई

शहीद-गुरविंन्दर-को-अंतिम-विदाई

धारीवाल। जब शहीद की मां ने अपने बहादुर बेटे को कंधा दिया तो इस मंजर को देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। ये वही मां है जिसने कई दिनों से अपने बेटे को दूल्हे के रूप में देखने का सपना संजोया था लेकिन उसे क्या पता था उनका ये सपना बेटे की चिता के साथ ही राख हो जाएगा। यहाँ के गांव मानेपुर के जवान गुरविन्दर सिंह का शनिवार को यहां सम्मान के साथ अंतिम संस्कार कर दिया गया। 26 वर्षीय युवक गुरविन्दर सिंह 8 जून को पुंछ राजौरी में आतंकवादियों से लड़ता हुआ शहीद हो गया था।





शादी की तैयारी अधूरी रह गई 

शहीद-गुरविन्दर-सिंह

शहादत की खबर के बाद मां और पारिवारिक सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल है

शहीद की मां बड़ी खुशी के साथ उसकी शादी की तैयारी कर रही थी फिर….अचानक खबर मिली कि उसका बेटा देश के लिए शहीद हो गया। शहादत की खबर से पारिवारिक सदस्यों का रो-रो कर बुरा हाल है। शहीद की मां ने अपने बहादुर बेटे को कंधे पर उठाकर उसको अंतिम विदाई दी। इस दौरान रिश्तेदार और बड़ी तादाद में गांव वाले शहीद की अंतिम यात्रा में शामिल हुए।

शहीद-गुरविन्दर-सिंह

शहीद गुरविन्दर की मां ने अंतिम विदाई से पहले बेटे को भावभीनी श्रद्धांजलि दी

दोनों बेटों में देश सेवा का जज्बा

शहीद के पिता सतविंदर सिंह ने बताया कि वीरवार दोपहर बटालियन की तरफ से उनको बेटे की शहादत संबंधी फोन आया था। शहीद की मां सरबजीत कौर का रो-रो कर बुरा हाल है। पिता सतविंदर सिंह ने बताया कि उनका दूसरा बेटा भी सेना में है।

गुरविन्दर BSF में था तो दूसरा रुपिन्दर भारतीय फौज में है। बचपन से ही दोनों में देश सेवा का जज्बा था। गुरविन्दर 2012 में BSF की 137वीं बटालियन में भर्ती हुआ था। दो माह पूर्व ही उसने जालंधर से पुंछ राजौरी सेक्टर में अपनी डयूटी संभाली थी। हंसमुख और मिलनसार गुरविन्दर हॉकी प्लेयर था और जालंधर की हॉकी टीम में खेलता था। गुरविन्दर सिंह की अभी शादी नहीं हुई थी।

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