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एक ने आँखें गंवाई तो दूसरे ने उससे कर ली शादी: दो जांबाजों की जीवन कथा

इंद्राक्षी

 नई दिल्ली/टेकनपुर (मध्य प्रदेश)। यूं तो इंद्राक्षी त्रिपाठी एक साधारण ताइक्वांडो एक्सपर्ट थीं लेकिन उनके एक फैसले ने उन्हें असाधारण बना दिया। कैसे…? जानकार आपको आश्चर्य होगा! दरअसल, उन्होंने एक वैवाहिक विज्ञापन देखकर एक ऐसे शख्स से शादी करने का फैसला किया जो द्रष्टिहीन था लेकिन जांबाज था। …तो इंद्राक्षी ने भी उसकी ‘आँखें’ बनने का जांबाजी भरा फैसला लिया और अब इनकी शादी के 13 साल हो गए हैं।





सीमा सुरक्षा बल (BSF) के असिस्टेंट कमांडेंट संदीप मिश्रा ने साल 2000 में असम में उग्रवादियों के खिलाफ एक ज्वाइंट ऑपरेशन के दौरान गोली लगने से अपनी आंखों की रोशनी गंवा दी थीं। उनके जज्बे को देखते हुए उन्हें भारत सरकार से 2004 में गैलेंट्री अवॉर्ड दिया गया, लेकिन अब उनके परिवार को उनकी शादी की चिंता सता रही थी। ऐसे में एक ताइक्वांडो एक्सपर्ट लेडी ने आगे बढ़कर उनसे शादी करने की इच्छा जाहिर करते हुए कहा कि वह संदीप से ही शादी करना चाहती हैं।

संदीप मिश्रा

संदीप मिश्रा को गैलेंट्री अवार्ड देते तत्कालीन गृह मंत्री शिवराज पाटील

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

असिस्टेंट कमांडेंट संदीप मिश्रा ने जनवरी 1999 में BSF ज्वाइन की। पहली पोस्टिंग कूच बिहार में मिली। इसके बाद आर्मी के साथ अटैचमेंट में रहे। तीसरी पोस्टिंग तिनसुकिया (असम) में हुई। जहां असम पुलिस के साथ ज्वाइंट ऑपरेशन में उग्रवादियों के खिलाफ ऑपरेशन में शामिल हुए। 13 दिसंबर 2000 को उग्रवादियों के साथ मुठभेड़ के दौरान संदीप के शरीर में 5 गोलियां लगीं। जिसमें से एक गोली बाईं आंख में लगी और जिस वजह से नाक की हड्डी भी टूट गई। गंभीर रूप से जख्मी होने के कारण उन्हें लंबे इलाज और कई ऑपरेशन से गुजरना पड़ा।

इंद्राक्षी ने क्यों की संदीप से शादी?

देश के लिए अपनी जान की बाजी लगाने वाले इस सपूत के ड्यूटी के दौरान अपनी आंख की रोशनी गंवा देने के चलते परिवार को उनकी शादी की चिंता थी। इसलिए शादी का एक एड दिया गया। इस एड को पढ़ने के बाद इंद्राक्षी त्रिपाठी ने संदीप से शादी करने का फैसला किया और अपनी इच्छा घर वालों को बताई।

संदीप-मिश्रा

असिस्टेंट कमांडेंट संदीप मिश्रा अपनी पत्नी इंद्राक्षी त्रिपाठी के साथ (फाइल फोटो)

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

 

इस फैसले से इंद्राक्षी के परिवार के लोगों को काफी हैरानी हुई। उन्होंने इंद्राक्षी से पूछ लिया कि तुम संदीप से ही शादी क्यों करना चाहती हो। तब इंद्राक्षी ने कहा कि जो अफसर देश की रक्षा की खातिर अपनी आंखें खो सकता है, तो क्या मैं उससे शादी भी नहीं कर सकती। वैसे भी भारतीय महिलाओं में हर हालात से लड़ने और जीतने की ताकत है। इंद्राक्षी की पॉजिटिव सोच और जिद के बाद बात आगे बढ़ाई गई और साल 2004 में दोनों शादी के बंधन में बंध गए। इंद्राक्षी पारिवारिक जिम्मेदारियों को संभालने के साथ ही आज BSF सीनियर सेकंडरी स्कूल, टेकनपुर में हिंदी की टीचर हैं। इससे पहले वह बस्ती में टीचर रही हैं। इसके साथ ही ताइक्वांडो एक्सपर्ट भी। उनके एक बेटी भी है। इंद्राक्षी मूलत: इलाहाबाद की रहने वाली हैं। उनकी शुरुआती पढाई इलाहाबाद में ही हुई। उन्होंने दिल्ली के स्वामी श्रद्धानंद कालेज से ग्रेजुएशन की है।

…5 गोलियां लगने के बाद भी नहीं मानी हार

संदीप मिश्रा

प्यार भरे पल : संदीप मिश्रा अपनी पत्नी इन्द्राक्षी और बेटी के साथ

  • 5 गोलियां लगने के बाद संदीप को एक वक्त तो ऐसा लगा कि अब उनकी जिंदगी में कुछ नहीं बचा, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
  • यही वजह रही कि दो महीने में हुए तीन ऑपरेशन के बाद उन्होंने देहरादून में री-हेबीटेशन में कम्प्यूटर कोर्स ज्वाइन किया।
  • इसके बाद दिल्ली से भी कम्प्यूटर कोर्स ज्वाइन करने के बाद दिसंबर 2005 में BSF एकेडमी टेकनपुर में कम्प्यूटर टीचर के तौर पर ज्वाइन किया।
  • 1 दिसंबर 2016 को BSF के इस्टेबलिशमेंट डे के मौके पर नई दिल्ली में दिव्यांग स्किल डेवलपमेंट सेंटर का को-एडवाइजर भी बनाया गया।

गृह मंत्री ने BSF असिस्टेंट कमाडेंट और उनकी पत्नी की तारीफ की

जब केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह टेकनपुर दौरे के दौरान उनसे मिलने पहुंचे और उनके परिवार के साथ भोजन भी किया। उन्होंने अधिकारी के साहस की सराहना की। उन्होंने परिवार के साथ भोजन के अनुरोध को खुशीपूर्वक स्वीकार कर लिया। सिंह ने कहा कि यह देश के प्रति उनका प्यार है जो संदीप और इंद्राक्षी को एक साथ जोड़ता है। टेकनपुर में उनके घर में भोजन कर काफी प्रसन्नता हुई। उन्होंने कहा कि बीएसएफ अधिकारी संदीप को अपनी पत्नी से शक्ति मिलती है जिन्होंने उनके विशिष्ट रूप से योग्य होने के बावजूद उनसे शादी करने का फैसला किया।

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