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BSF की सभी भर्तियों में करप्शन, अफसरों पर भी शक

बीएसएफ-जवान

नई दिल्ली।  हाल ही में बीएसएफ में नियुक्तियों को लेकर एक चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। इसमें बीसीएफ के मौजूदा डीजी के.के. शर्मा के दफ्तर से जारी दो पन्नों के एक संदेश में कहा गया है कि बीएसएफ में लगभग सभी पद और नियुक्तियां संदेह के घेरे में हैं और इनमें भ्रष्टाचार की आशंका है। जबकि अक्टूबर 2015 में बीएसएफ के पूर्व डीजी डीके पाठक ने फोर्स की तारीफ करते हुए कहा था कि उन्हें बीएसफ पर गर्व है, क्योंकि यहां भ्रष्टाचार के मामले बहुत कम है।





यह आदेश बीएसएफ के एचआर विभाग की ओर से जारी किया गया है, जो जवानों की सर्विस से जुड़े मुद्दे को देखता है।अधिकारियों द्वारा पारित इस आदेश में कोई सफाई या भ्रष्टाचार के खिलाफ किसी तरह की कार्रवाई और उपायों का जिक्र नहीं किया गया है, लेकिन आदेश के मुताबिक बीएसएफ का फोर्स मुख्यालय, कमांड मुख्यालय, ट्रेनिंग संस्थान, सीमांत मुख्यालय, सेक्टर मुख्यालय और बटालियन मुख्यालय की नियुक्तियां इसके दायरे में आती हैं। इस आदेश के अनुसार, कई जांचों में यह पाया गया है कि विभाग के जूनियर अधिकारी भी भ्रष्टाचार के घेरे से मुक्त नहीं है।

BSF जवान (फाइल फोटो)

सीमा सुरक्षा में लगे बीएसएफ जवान (फाइल फोटो)

राशन और वेलफेयर अधिकारी भी शक के घेरे में

उदाहरण के तौर पर बटालियन मुख्यालयों में जवानों को दिये जाने वाले राशन और वेलफेयर की जिम्मेदारी संभावने वाले अधिकारी भी अब इस आदेश के अनुसार शक के दायरे में हैं। इसके अलावा जो अधिकारी भर्ती, पोस्टिंग, निर्माण, नगद, खाता और विजिलेंस से जुड़े हैं। अब उनकी सख्ती से निगरानी की जाएगी।

तेज बहादुर यादव के आरोपों के बाद लाई गई सख्ती

इस मामले पर अबतक गृह मंत्रालय या फिर बीएसएफ मुख्यालय की प्रक्रिया नहीं मिली है। बीएसएफ में कई अधिकारी इस घटना को कॉन्स्टेबल तेज बहादुर यादव द्वारा लगाये गये आरोपों के बाद कथित करप्शन को दूर करने की तैयारी से जोड़ कर देख रहे हैं। आपको बता दें कि तेज बहादुर यादव ने बीएसएफ कैंटीन में खाने पीने में गड़बड़ी की शिकायत की थी। तेज बहादुर यादव ने जवानों को परोसे जाने वाले खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड़ कर दिया था इसके बाद काफी विवाद हुआ था। बाद में एक जांच के बाद इसी साल 19 अप्रैल को तेजबहादुर को नौकरी से निकाल दिया गया था।

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