Assam Rifles

नगालैंड में जांबाज मेजर शहीद, असम राइफल्स ने मार गिराए 4 उग्रवादी

नगालैंड एनकाउंटर

कोहिमा। पूर्वोत्तर भारत में सक्रिय उग्रवादियों से लोहा लेते हुए मुठभेड़ के दौरान एक मेजर की शहादत हो गई। सेना ने चार आतंकियों को भी मार गिराया लेकिन एक नागरिक भी इस घमासान के बीच जान गंवा बैठा। मुठभेड़ में सेना के तीन जवान घायल हो गए।





शहीद हुए मेजर डेविड मनलुन (Major David Manlun) टेरिटोरियल आर्मी की नगा बटालियटन से थे और मणिपुर के मूल निवासी थे। हमलावर उग्रवादियों का ताल्लुक उल्फा और नेशनल सोशलिस्ट कौंसिल आफ नगालैंड (NSCN-K) के खापलांग गुट से था। लेफ्टिनेंट कर्नल कोन्वेर ने बताया कि मुठभेड़ स्थल नगालैंड के पूर्व में यहाँ से 350 किमी दूर और म्यांमार बार्डर से 20-25 किमी दूर है। सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके को घेर कर तलाशी अभियान तेज कर दिया है।

नगालैंड एनकाउंटर

घटना नगालैंड के मोन जिले में तिजित सब डिवीजन के अंतर्गत ओटिंग कस्बे व लापा लेमपोंग के बीच मंगलवार व बुधवार की मध्य रात्रि 12.30 बजे के आसपास उस समय हुई जब खुफिया सूचना पर मेजर डेविड मनलुन की अगुआई में जवानों की एक टीम म्यांमार बार्डर के करीब सुदूर क्षेत्र लापा (Lappa) गई थी। नगालैंड के प्रतिबंधित आतंकी संगठन एनएससीएन खापलांग (के) और प्रतिबंधित संगठन उल्फा (स्वाधीन) के कैडरों की मौजूदगी की जानकारी मिलने पर सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर ली।

सेना ने जैसे ही आपरेशन शुरू किया, आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी और ग्रेनेड फेंके। इस हमले में मेजर शहीद हो गए। जवाबी कार्रवाई में दोनों आतंकी संगठनों के चार आतंकियों के मारे जाने की जानकारी मिली है। जिस आटो में आतंकी सवार थे उसके ड्राइवर की भी मौत होने की जानकारी मिली है। मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद का जखीरा बरामद हुआ है। मुठभेड़ के दौरान 12 पैरा रेजिमेंट के तीन जवान भी घायल हुए हैं, जिन्हें असम के जोरहाट जिला मुख्यालय सेना के अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। मुठभेड़ बुधवार की सुबह तक जारी रही। शहीद मेजर डेविड 164 टेरिटोरियल आर्मी असम राइफल्स में डेप्यूटेशन पर तैनात थे। वे मूलतः प्रथम नगा बटालियटन में भर्ती हुए थे।

  • शहीद अफसर 164 टेरिटोरियल आर्मी की नगा बटालियटन के मेजर डेविड मनलुन
  • शहीद मेजर बड़े संभ्रांत परिवार से ताल्लुक रखते थे। उनके पिता (सेवानिवृत्त) खामजालाम 5वीं असम रेजिमेंट में सार्जेंट मेजर के पद पर अपनी सेवाएं दे चुके हैं, जबकि एक भाई 8वीं असम रेजमेंट में जम्मू में तैनात हैं। वहीं उनकी बहन का विवाह सेना के 5वीं असम रेजिमेंट के ले. कर्नल आशुतोष से हुआ है। शहीद मेजर का पालन-पोषण मेघालय की राजधानी शिलांग के हैप्पी वैली इलाके में हुआ। वे मूलतः कुकी जनजाति के बताए गए हैं।
  • मुठभेड़ स्थल से भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद का जखीरा बरामद, मुठभेड़ के दौरान 12 पैरा रेजिमेंट के तीन जवान भी घायल हुए हैं
  • एके सीरिज की रायफलें, भारी मात्रा में जीवित कारतूस, हैंडग्रेनेड, दवाइयां, कंबेट यूनिफार्म, राशन आदि बरामद

सूत्रों ने दावा किया है कि मुठभेड़ स्थल पर और भी आतंकी थे, जो अंधेरे का फायदा उठाते हुए फरार होने में सफल हो गए। घटनास्थल से भारी मात्रा में हथियार व गोला-बारूद बरामद किया गया है। जिसमें एके सीरिज की रायफलें, भारी मात्रा में जीवित कारतूस, हैंडग्रेनेड, दवाइयां, कंबेट यूनिफार्म, राशन आदि बरामद किया गया है।

उल्लेखनीय है कि मोन जिला पड़ोसी देश बर्मा (म्यांमार) से सटा हुआ इलाका है। बर्मा के सीमाई इलाके में एनएससीएन (खापलांग) का प्रशिक्षण शिविर है। सूत्रों ने दावा किया है कि उल्फा (स्वा) के कैडर एनएससीएन (के) के प्रशिक्षण शिविर से प्रशिक्षण प्राप्त कर असम में प्रवेश करने के लिए आटो पर सवार होकर असम में जा रहे थे। तिजित असम की सीमा से सटा हुआ इलाका है। इसकी जानकारी सेना सूत्रों को मिल गई, जिसके चलते सेना ने ओटिंग कस्बे व लापा लेमपोंग बीच आतंकियों को घेर लिया।

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