Assam Rifles

जानिए, इस भारतीय फ़ौजी से मिलकर दलाई लामा की आँखों में क्यों आए आंसू

गुवाहाटी: तिबब्त के निर्वासित नेता दलाई लामा अगर आज जिंदा है तो नरेन चंद्र दास नामक उस शख्स की बदौलत जो एक जमाने में असम रायफल्स का जवान था। 1959 में तब नरेन चंद्र दास महज 20 साल के जवान थे, जब वह दलाई लामा को तिब्बत से निकालकर भारत लाए थे। उस समय दलाई लामा की उम्र 23 साल थी। वही नरेन यहां ‘नमामि ब्रम्ह्पुत्र’ कार्यक्रम के दौरान जब दलाई लामा के सामने आए तो तिब्बत के निर्वासित नेता दलाई लामा की आंखें नम हो गईं। दलाई लामा ने उन्हें गले लगा लिया और धन्यवाद दिया।





नरेन चंद्र दास से मिलकर दलाई लामा खामोश हो गए। उन्होंने उन्हें सैल्यूट किया और गले लगा लिया। इस दौरान उनकी आंखों से आंसू बहते रहे। दलाई लामा ने कहा, “मैं इस बुजुर्ग शख्स (नरेन चंद्र दास) से मिलकर बहुत खुश हूं, इन्होंने मार्च 1959 में मेरी सुरक्षा की थी। ये 58 साल पहले की बात है।’ दास की तरफ देखते हुए दलाई लामा ने कहा, ‘आप अब रिटायर हो गए होंगे। आपके चेहरे की तरफ देखकर मुझे महसूस हो रहा है कि मैं भी बूढ़ा हो गया हूं।”

जब नरेन से पूछा गया कि इस दौरान उनकी दलाई लामा से कोई बात हुई तो इससे इन्कार करते हुए नरेन ने कहा कि उस दौरान हमें उनसे बात करने की अनुमति नहीं थी, यात्रा के दौरान हमारा काम सिर्फ उन्हें एस्कॉर्ट करना था। नरेन के अनुसार इतने साल बाद मुलाकात में दलाई लामा ने गले लगाया तो बहुत अच्छा लगा और उन्होंने मेरे कान में कहा कि मुझे देखकर उन्हें खुशी हुई। इस दौरान दलाई लामा ने नरेन को एक सिल्क की शॉल भी भेंट की।

नरेन उस समय को याद करते हुए कहते हैं कि 1957 में असम रायफल्स में शामिल होने के बाद वह दलाई लामा के आर्म्ड गार्ड बने। उस समय नरेन चीन सीमा पर लुंगला में तैनात थे और अरुणाचल प्रदेश के तवांग में अपनी ट्रेनिंग पूरी की थी। दास पांच जवानों के उस समूह के सदस्य थे जो 31 मार्च 1959 को तिब्बत पर चीन के कब्जे के बाद दलाई लामा को भारत लाए थे।

तब दलाई लामा की सुरक्षा में नरेन चंद्र समेत असम रायफल्स के प्लाटून नंबर 9 के गार्ड्स उन्हें जुथांगबो से लेकर आए और नरेन समेत 5 लोगों को सौंप दिया। ये लोग दलाई लामा को लुंगला लेकर आए जहां से जवानों के एक अन्य ग्रुप द्वारा उन्हें तवांग ले जाया गया। ड्यूटी के समय दास को दलाई लामा से बातचीत करने की अनुमति नहीं थी इसलिए वह उनसे बातचीत भी नहीं कर पाए थे। दास उस ग्रुप (जो दलाई लामा को भारत लाया) के इकलौते जीवित सदस्य हैं।

केंद्रीय गृह राज्य मंत्री किरेन रिजिजू ने दलाई लामा और नरेन चंद्र दास के मुलाकात की तस्वीरें अपने ट्विटर पर साझा की। उन्होंने लिखा है,  “आंसू नहीं रुक रहे। असम राइफल्स के जवान से गले मिलते दलाई लामा, असम राइफल्स का मेंबर जिसने 1959 में भारत पहुंचे दलाई लामा को सुरक्षा दी।” रिजिजू ने दलाई के भारत पहुंचने के वक्त की कई अन्य तस्वीरें भी ट्वीट की हैं।

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