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20 साल बाद राजपथ पर दिखेगी आईटीबीपी की झांकी

आईटीबीपी की झांकी

नई दिल्ली। 69वें गणतंत्र दिवस परेड पर इस बार भारत तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) की झांकी एक विशेष आकर्षण का केंद्र होगी। इस झांकी में पर्वतीय इलाकों में सीमा पुलिस बल द्वारा पेट्रोलिंग, बर्फीले इलाके, पर्वतारोहण के दौरान बल की उपलब्धियां, रिवर राफ्टिंग तथा साहसिक खेलों और शीत वस्त्र उपकरणों आदि को दर्शाया गया है।





इस झांकी के आगे वाले भाग पर स्नो स्कूटर को स्थापित किया गया है। साथ ही बीच और पीछे के हिस्से में नदी या अवरोध पर करने, हिमालय में बचाव अभियानों में स्थानीय संसाधनों का कुशल उपयोग आदि को डमी के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

आईटीबीपी की महिला कर्मियों की टुकड़ी इस झांकी का हिस्सा होगी, जो इसके साथ दोनों और मार्च करेंगी। आईटीबीपी ने वर्ष 2016 से महिला कर्मियों को भी हिमालय की सीमाओं पर तैनात किया है।

झांकी के दौरान आईटीबीपी का बल गीत ‘हम सरहद के सेनानी’ झांकी की पृष्ठभूमि में सुनाई देगा। पर्वतारोहण में अग्रणी आईटीबीपी ने रिकॉर्ड 208 पर्वतारोहण अभियानों का सफल संचालन किया है।

बल की झांकी अंतिम बार साल 1998 में राजपथ पर दिखी थी, तब इसमें विश्व स्तर के पर्वतारोहियों और विश्व की कुछ सबसे ऊँची चोटियों को प्रदर्शित किया गया था। अब 20 साल बाद अपने गौरवगाथा का बखान करती हुई यह झांकी पूरे देश के सामने दिखेगी।

गौरतलब है कि आईटीबीपी जम्मू-कश्मीर के काराकोरम से अरुणाचल प्रदेश के जेचप ला तक हिमालय के 5 राज्यों की कठिन मौसमी और धरातलीय सीमाओं की सुरक्षा के लिए तैनात है और इसकी चौकियां 3 हज़ार से 19 हज़ार फीट तक की ऊंचाइयों में स्थित हैं।

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