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खास रिपोर्ट: थलसेना को मिली स्वदेशी होवित्जर धनुष तोप

स्वदेशी 'धनुष' तोप
स्वदेशी होवित्जर धनुष तोप

नई दिल्ली। जबलपुर की गन कैरेज फैक्टरी ने भारतीय थलसेना की सेंट्रल आर्डनेंस डिपो को सोमवार (8 अप्रैल) को देश में बनी पहली होवित्जर तोप घनुष  सौंप दी।





अस्सी  के दशक में  बोफोर्स तोप सौदे में दलाली के आरोपों के बाद  सौदा रद्द हो गया था और इसके बाद  भारतीय. सेना को नई होवित्जर तोपें नहीं मिलीं। इस सौदे के तहत थलसेना को चार सौ तोपों की सप्लाई हुई थी और चार सौ तोपें भारत में ही बोफोर्स कम्पनी के सहयोग से बनाई जानी थी। यह ठेका लागू नहीं होने की वजह से  भारतीय आयुध कारखाना बोर्ड ( ओ एफ बी ) ने बोफोर्स की क्षमता वाली होवित्जर तोपों को देश में बनाने का बीडा उठाया और इसी का नतीजा है कि भारतीय सेना को तीन दशक बाद पहली बार नई स्वदेशी  होवित्जर तोपें मिली हैं।

भारतीय सेना की ओर से 114  होवित्जर तोपें बनाने का आर्डर पिछले साल  18 फरवरी को दिया गया था। अब गन कैरेज फैक्टरी थलसेना को छह तोपें सौंपने को तैयार है। इसके लिये जबलपुर में एक औपचारिक समारोह आयोजित हुआ जिसमें रक्षा उत्पादन विभाग के मुख्य सचिव अजय कुमार मुख्य अतिथि थे। इस मौके पर थलसेना के तोपखाना के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल पी के श्रीवास्तव  और थलसेना के अन्य आला कमांडर मौजूद थे।

आर्डनेंस  फैक्टरी बोर्ड  की  155 मिमी गुना 45 कैलिबर की एफ एच गन धनुष थलसेना में  पहले से मौजूद 155 मिमी, की 39 कैलिबर वाली गन से काफी अडवांस्ड बताई जा रही है। अधिकारियों के मुताबिक देश में बनी यह तोप 81 प्रतिशत स्वदेशी उपकरणों पर आधारित है। यह नई पीढ़ी की खींची जाने वाली आर्टिलरी गन है। यह दुनिया की  श्रेष्ठतम  तोपों की क्षमता के बराबर बताई जा रही है।  इस अवसर पर अजय कुमार ने कहा कि गन कैरेज फैक्टरी बोर्ड के लिये यह एक विशिष्ट उपलब्धि है।

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