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पोखरण: गोला दागते ही फट गया M-777 गन का बैरल

अल्ट्रालाइट हॉवित्जर तोप

नई दिल्ली। भारतीय सेना में शामिल होने जा रही नई तोप एम 777 हादसे का शिकार उस वक्त हो गई जब इससे भारतीय गोला बारूद फायर किया जा रहा था। सेना राजस्थान के पोखरण फील्ड रेंज में इस गन का ट्रायल कर रही थी, जिस समय यह हादसा हुआ। सवाल यह उठता है कि आखिर क्या वजह थी जिससे अमेरिका में बनी गन का बैरल भारतीय गोला-बारूद के दबाव को झेल नहीं सका ? फिलहाल बैरल फटने के कारणों की जांच सेना और अमेरिकी कंपनी की संयुक्त टीम मौके पर मिलकर कर रही है।





जांच दल नुकसान का आकलन करेगी और इसके रिपोर्ट के बाद ही दोबारा फायरिंग शुरू की जाएगी। M-777 की 145 गन सेना में शामिल की जाएंगी। अमेरिकी कंपनी बीएई से खरीदी जा रही हैं। आर्टिलिरी एफएमएस (फॉरेन मिलेट्री रूट) समझौते के तहत मई महीने में दो हॉवित्जर गन भारत लाई गई थीं।

गत वर्ष 30 नवंबर को भारत ने इन तोपों को खरीदने के लिए अमेरिका के साथ समझौता किया था। 17 नवंबर को केंद्रीय कैबिनेट से इस समझौते को मंजूरी मिली थी।

जानकारों के मुताबिक इन तोपों के भारतीय सेना में शामिल होने के बाद उसकी ताकत बढ़ जाएगी। खासतौर पर चीन के साथ बढ़ते तनाव को देखते हुए यह सौदा काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इन तोपों को चीन से लगी सीमा की पहाड़ियों पर तैनात करने के मद्देनजर खरीदा गया है।  कंपनी लगभग 145 गन भारत को सौंपेगी, जिसमें 25 गन कंपनी सीधे सौंपेगी और बाकी महिंद्रा कंपनी की मदद से भारत में ही बनाई जाएगी।

एम 777 की क्या है खासियतें:

  • ऑप्टिकल फायर कंट्रोल वाली हॉवित्जर से तकरीबन 40 किलोमीटर दूर स्थित टारगेट पर सटीक निशाना लगाया जा सकता है।
  • डिजिटल फायर कंट्रोल वाली यह तोप एक मिनट में 5 राउंड फायर करती है। 155 MM की हल्की हॉवित्जर सेना के लिए बेहद खास है, क्योंकि इसको जम्मू-कश्मीर और अरुणाचल प्रदेश जैसे पहाड़ी क्षेत्रों में आसानी से हेलिकॉपटर से कहीं भी ले जाया जा सकता है।
  • सेना में माउंटेन स्ट्राइक कोर के गठन के बाद इस गन की जरूरत और ज्यादा महसूस की जा रही थी। हॉवित्जर 155 MM की अकेली ऐसी गन है, जिसका वजन 4,200 किलोग्राम से कम है।

बोफोर्स सौदे में दलाली का आरोप लगने पर देश में 155 MM की गन बनाने की ऑर्डनेन्स फैक्ट्री बोर्ड के प्रयास उतने कामयाब नहीं रहे हैं। ट्रायल के दरम्यान गन बैरल फटने की घटनाएं भी सामने आईं थीं।

वर्ष 1980 में हुए स्वीडिश कंपनी से बोफोर्स तोपें खरीदी गईं थीं पर इस सौदे को लेकर बहुत विवाद हुआ था और तत्कालीन केंद्र सरकार पर भ्रष्टाचार का आरोप लग गया था। उसके बाद से भारतीय सेना के लिए कई साल तक तोप की खरीद-फरोख्त नहीं हुई। जबकि देखा जाए तो कारगिल युद्ध के वक्त बोफोर्स तोपों के बदौलत भारतीय सेना ने पाकिस्तान सेना को भागने पर मजबूर कर दिया था।

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