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बैरल फटने के बाद गोलाबारूद की गुणवत्ता पर सवाल

हॉवित्जर तोप

नई दिल्ली। गोला-बारूद को लेकर अकसर सवाल उठते रहे हैं पर हॉवित्जर तोप के परीक्षण के दौरान बैरल फटने के बाद कई सारे सवाल खड़े हो गए हैं। गोला-बारूद को लेकर जानकारों के मुताबिक तीन तरह की शिकायतों सामने आईं हैं। एक-  गोला बारूद का बंदूक या बैरल के अंदर फट जाना। दूसरा- इस्तेमाल के ऐन वक्त पर निष्क्रिय हो जाना और तीसरा भंडारण के दौरान विस्फोट होना।





तोप के बैरल फटने के मामले को लेकर बाहरी एजेंसी से जांच कराने पर विचार किया जा रहा है। वैसे तो मामले की विशेषज्ञ जांच कर रहे हैं लेकिन शुरुआती जांच में जो बात सामने आई है वह गोला बारूद से जुड़ी हुई है। वहीं ऑर्डिनेंस फैक्ट्री बोर्ड (OFB) का मानना है कि गोला बारूद की गुणवत्ता बैरल टूटने के लिए जिम्मेदार नहीं है। सेना से जुड़े जानकारों के मुताबिक देश में निर्मित हो रहे गोला बारूद की गुणवत्ता में खामियां पाई गईं हैं। समय-समय पर ओएफबी का ध्यान इस ओर आकृष्ट कराया गया है।

110 तरह के गोला बारूद खरीदती है सेना

सेना आयुद्ध कारखानों से करीब 110 तरह के गोला बारूद खरीदती है। अब तक की रिपोर्ट के अनुसार करीब 23 किस्म के गोला बारूद की गुणवत्ता में खराबी की शिकायत पाई गई। करोड़ों रूपये के गोला बारूद समय-समय पर आयुद्ध कारखानों को वापस लौटाना पड़ा है। जानकारों के अनुसार गुणवत्ता सुधारने की तमाम कोशिशों के बावजूद इस तरह के हादसे हो रहे हैं। जिसमें हॉवित्जर तोप का मामला सबसे ताजा है।

हॉवित्जर तोप के बैरल के फटने की घटना से इतर सेना का कहना है कि जो जांच गोला बारूद की गुणवत्ता को लेकर अब तक हुई हैं, उनमें तीन वजहें प्रमुख रूप से सामने आई हैं। पहला- निर्माण के दौरान सामाग्री में खराबी आना, दूसरा- इस्तेमाल और रखरखाव में चूक होना। तीसरा- हथियार की डिजाइन में खराबी या उसे ठीक से इस्तेमाल नहीं करना है।

बाहरी एजेंसी करेगी जांच

आयुद्ध कारखानों में निर्मित गोलाबारूद की जांच पहले ओएफबी का गुणवत्ता नियंत्रण विभाग करता है। इसके बाद सेना के गुणवत्ता आश्वासन महानिदेशालय द्वारा की जाती है। गुणवत्ता नियंत्रण विभाग गोला बारूद में लगे सभी पदार्थों की गुणवत्ता की जांच सुनिश्चित करता है। लेकिन गुणवत्ता पर दोबारा सवाल उठाने के बाद अब एक बाहरी एजेंसी से भी जांच पर विचार किया जा रहा है। खबर है कि आने वाले दिनों में विदेशों में हथियारों की गुणवत्ता जांच करने वाली किसी एजेंसी को यह कार्य सौंपा जा सकता है।

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