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‘केमिकल अटैक’ पर सबक सिखाने के लिए अमेरिका ने ब्रिटेन और फ्रांस के साथ सीरिया पर दागी मिसाइलें, क्रोधित हुआ रूस

दमिश्क अमेरिका ने संदिग्ध केमिकल अटैक पर सबक सिखाने के लिए ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिलकर सीरिया पर हवाई हमले किए हैं। सीरिया की राजधानी दमिश्क में तेज धमाकों के साथ तकरीबन 100 मिसाइलें दागी गईं। मीडिया खबरों के अनुसार वहीं जवाबी कार्रवाई में सीरिया की असद सरकार ने भी अमेरिका को जवाब देने के लिए ऑपरेशन शुरू करते हुए एंटी गाइडेड मिसाइल को लॉन्च कर दिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक इन हमलों में अमेरिकी टॉमहॉक मिसाइलों का इस्तेमाल भी किया गया है।





दरअसल, सीरिया में बशर-अल-असद की सरकार द्वारा रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को रोकने के रूस के प्रयासों में रूस के असफल होने के बाद सीरिया पर अमेरिका, ब्रिटेन और  फ्रांस ने यह संयुक्त अभियान शुरू किया है।

वहीं रूस ने तीनों देशों की संयुक्त कार्रवाई पर चेतावनी देते हुए कहा कि इसका नतीजा युद्ध हो सकता है। इन हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया जाहिर करते हुए रूस ने इसे राष्ट्रपति पुतिन का अपमान करार दिया है। रूस ने कहा कि इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। सीरिया के मसले पर देश को संबोधित करते हुए डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘कुछ समय पहले हमने अमेरिका के सैन्य बलों को आदेश दिया है कि सीरिया के तानाशाह बशर अल असद की रासायनिक क्षमता को निशाना बनाते हुए हमले करे’ रूस को घेरते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, ‘सीरिया पर हुआ हमला असद के रासायनिक हथियारों के इस्तेमाल को रोकने की रूस की विफलता का प्रत्यक्ष परिणाम है।’

गौरतलब है कि सीरिया के पूर्वी गोता के विद्रोहियों के कब्जे वाले अंतिम शहर डूमा में हुए एक संदिग्ध रासायनिक हमले में 500 लोग चपेट में आए जिनमें तकरीबन 80 लोग मारे जा चुके हैं। बीते शनिवार हुए इस केमिकल अटैक में मारे जाने वालों में बड़ी संख्या में बच्चे और महिलाएं हैं।

सीरिया पर अमेरिकी हमलों की ब्रिटिश, फ्रांसीसी सहयोगियों के साथ मिलकर शुरू की गई प्रक्रिया अब भी चल रही है। जहां धूल और धुएं के बड़े गुबार उठते दिखाई दे रहे हैं। सीरिया पिछले सात साल से गृह युद्ध की आग में जल रहा है।  अमेरिकी प्रशासन ने आरोप लगाया है कि इस दौरान सीरिया के राष्ट्रपति बशर अल असद की सरकार ने कम से कम 50 बार केमिकल हथियारों का इस्तेमाल किया जबकि दुनिया भर में किसी भी युद्ध में केमिकल हथियारों के इस्तेमाल पर प्रतिबंध हैं।

अमेरिका के रक्षा मंत्री जेम्स मैटिस ने कहा है कि हमलों से असद को एक सख्त सन्देश मिलेगा। वहीँ ब्रिटेन की प्रधान मंत्री टेरीजा मे का कहना है कि सीरिया में सेना के इस्तेमाल के अलावा कोई और विकल्प नहीं है।

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