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ये 1962 नहीं है, 1967 है चीन को कैसे बताया, दिखाएगी फिल्म ‘पलटन’, 8 खास बातें

‘बॉर्डर’ और ‘एलओसी-करगिल’ जैसी युद्ध फिल्में बनाने वाले निर्देशक जेपी दत्ता एक बार फिर बॉक्स आफिस पर हुंकार भरने आ रहे हैं। इस बार वह लेकर आ रहे हैं ‘पलटन’। इस फिल्म की पृष्ठभूमि भी युद्ध की है। सीमित लेकिन ऐसा युद्ध जिसने चीन के हौंसले पस्त कर दिये।





चीन को सिखाया था सबक

फिल्म की कहानी 1967 के उस सैन्य संघर्ष की है जो नाथूला में हुआ था। चीन अकसर 1962 के युद्ध की बात करता है लेकिन 1967 का वह जिक्र भी नहीं करता तो उसकी वजह यह है कि चीन को इस संघर्ष में मुंह की खानी पड़ी थी। यही वह संघर्ष था जिसमें भारतीय सेना के जवानों की दिलेरी के सामने चीनी सेना की टांगें कांप गई थीं। चीनी सेना की अकारण फायरिंग का भारतीय जवानों ने ऐसा जवाब दिया कि उसके 300-400 सैनिक हताहत हो गये। जानकारों का कहना है कि इसका नतीजा यह हुआ कि सरहद पर चीनी सैनिकों की आज तक गोली चलाने की हिम्मत नहीं हुई है। संघर्ष के उन्हीं पलों को अब पर्दे पर उतारा है जेपी दत्ता ने और इसे नाम दिया है ‘पलटन’। ‘बॉर्डर’ और ‘एलओसी-करगिल’ की तरह ही इस फिल्म में भी सितारों की भरमार है। इस फिल्म में जैकी श्राफ, अर्जुन रामपाल, सोनू सूद, गुरमीत चौधरी, हर्षवर्धन राणे, सिद्धांत कपूर, लव सिन्हा सरीखे सितारे छोटी और बड़ी भूमिकाओं में नजर आएंगे। फिल्म अगले शुक्रवार (7 सितंबर) को प्रदर्शित हो रही है। वर्ष 1967 में सितंबर के दूसरे सप्ताह में ही नाथूला में भारतीय सेना ने चीन को सबक सिखाया था। फिल्म भारतीय जवानों के अदम्य साहस को तो दिखाएगी ही साथ ही यह संदेश भी देगी- ‘शहीद की मौत गोली लगने से नहीं होती है बल्कि तब होती है जब उसे भुला दिया जाता है।’

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