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ये हैं दुनिया के 10 सबसे घातक मार्शल आर्ट

मार्शल आर्ट एक ऐसी कला है जो आत्मरक्षा के साथ-साथ स्वस्थ बने रहने के लिए भी कारगर है। हम हमेशा मार्शल आर्ट अलग-अलग वजहों के कारण सीखते हैं। कुछ लोग इसे एक खेल के रूप में सीखते हैं तो कुछ इसे एक्सरसाइज और वजन घटाने के मकसद से सीखते हैंं लेकिन अधिकतर लोग इसे आत्मरक्षा के लिए सीखते हैं। यह कला मूल रूप से कोरिया से निकली है और करीब पांच हजार वर्ष पुरानी मानी जाती है।





आज हम आपको बताने जा रहे हैं दुनिया के 10 सबसे लोकप्रिय और बेहतरीन मार्शल आर्ट के बारे मेंः

ताइक्वान्डो मार्शल आर्ट

ताइक्वान्डो का अर्थ है किक और पंच (TAI का अर्थ पैर और KWAN का अर्थ मुट्ठी)। ताइक्वान्डो को इसकी तेज और घुमती हुई ऊंची किक की वजह से दुनिया की सबसे घातक मार्शल आर्ट में माना जाता है। यह दुनिया का पहला ऐसा मार्शल आर्ट है जिसे ओलंपिक में जगह मिली हुई है। ताइक्वान्डो के अभ्यासकर्ता में मजबूती, स्टैमिना, गति, बैलेंस और लचीलापन जैसे गुण मौजूद होते हैं

एकिडो (AIKIDO) मार्शल आर्ट

एकिडो एक बहुत ही बेहतरीन और प्रभावी मार्शल आर्ट मानी जाती है और यह अन्य मार्शल आर्ट के जैसा अधिक पुराना या परम्परागत भी नहीं है। एकिडो की उत्पत्ति और विकास सास्टर ‘MORIHEI UESHIBA’ ने की थी। एकिडो में लड़ाई किसी को पीटकर या मारकर नहीं बल्कि हराकर जीती जाती है। इसके एकिडो फाइटर अपनी सेफ्टी का और इस बात का पूरा ध्यान रखते हैं कि विरोधी को ज्यादा चोट न आए। देखा जाए तो एकिडो सभी जापानी मार्शल आर्ट्स में सबसे ज्यादा मुश्किल भरा है और इसे सिखने के लिए एकाग्रता और अभ्यास की आवश्यकता पड़ती है। इसे दुनिया का सबसे शांतिपूर्ण मार्शल आर्ट कहा जाता है पर इसका मतलब यह नहीं कि यह घातक नहीं है।

 जूजूत्सु (Jujutsu)

जूजूत्सु, जापान की एक ऐसी प्राचीन कला है जिसका इस्तेमाल समुराई अपने हथियारहीन होने की दशा में करते थे। अन्य आर्ट के विपरीत जूजूत्सु में अपने प्रतिद्वंदी को पकड़ना, दूर फेंकना और उसे काबू में करना है। जूजूत्सु एक विशेष मार्शल आर्ट इसलिए भी है क्योंकि इसमें अपने विरोधी के गुस्से और उसकी आक्रामकता का उसी के खिलाफ का उसी के खिलाफ इस्तेमाल किया जाता है। जूजूत्सु, उत्तरी अमेरिका में सबसे ज्यादा लोकप्रिय है

निन्जुत्सू मार्शल आर्ट

निन्जुत्सू मर्शाल आर्ट सीखने वाले को निंजा कहते हैं और कुछ समय पहले तक यह दुनिया की सबसे रहस्मयी मार्शल आर्ट्स में से एक थी। निंजा मार्शल आर्ट को जापानी इतिहास में हत्यारे और गुरिल्ला योद्धा सीखते थे और यही इसकी सबसे बड़ी काबलियत भी है। ऐसा माना जाता है कि घने जंगल और सुनसान जगहों पर निन्जुत्सू प्रशिक्षण कुख्यात गुरिल्ला योद्धाओं को दी जाती थी जो अंधेर में अचानक हमला करके दुश्मनों का काम तमाम कर देते थे। जापान के पुराने क्षेत्रों में तो आज भी लोग इन्हें स्पिरिट (आत्मा) योद्धा कहते हैं। देखा जाए तो यह आज कमांडोज की तरह है।

विंग चुन मार्शल आर्ट

17वीं शताब्दी में तेजी से लोगों के बीच लोकप्रिय होने वाला विंग चुन मार्शल आर्ट सबसे पहले एक बौद्ध भिक्षुणी नग मुई ने अविष्कार किया और इस मार्शल आर्ट के सभी रक्षात्मक और आक्रामक स्टाइल इन्होंने पशु, पक्षी और कीट पतंगों से प्रेरित होकर सीखी थी। विंग चुन आर्ट और बौद्ध भिक्षुणी की बातें लोगों ने मार्शल आर्ट के बेताज बादशाह ब्रुस ली से भी सुनी थी। विंग चुन की खास बात यह भी है कि यह एक ही वक्त में अटैक और डिफेंस दोनों सिखाता है और नजदीकी फाइटों में बहुत जानलेवा है।

मार्शल आर्ट ‘कराटे’

भारत में मार्शल आर्ट के लिए अगर कोई सबसे ज्यादा प्रयोग किए जाने वाला शब्द है तो वो है ‘कराटे’। कराटे एक जापानी शब्द है जिसका अर्थ है खाली हाथ और वास्तव में कराटे एक ऐसा मार्शल आर्ट है जिसमें कोई हथियार इस्तेमाल नहीं किया जाता। कराटे की शुरुआत 1300 साल पहले हुई थी लेकिन मार्डन कराटे के पितामह ‘ANKO  ITOSU’ माने जाते हैं जिन्होंने वर्ष 1908 में कराटे पर एक किताब ’10 PRECEPTS OF KARATE’ लिखी थी। इसे बेस्ट सेल्फ डिफेंसिव भी कहा जाता है।

कुंक फु मार्शल आर्ट

कहा जाए कि आज सबसे लोकप्रिय मार्शल आर्ट शब्द ‘कुंग फु’ है तो कोई गलत नहीं होगा। कुंग फु एक चाइनीज मार्शल आर्ट है जिसका अर्थ है ‘अपने से बड़े व शक्तिशाली पर विजय प्राप्त करना’ और अगर हम इसके मूल में जाए तो पाते है कि चीन में इस कला की शुरूआत एक भारतीय राजकुमार ‘बोधिधर्मन’ ने की थी। उनका नाम आज भी सभी चीनी आदर के साथ लेते हैं। चीनियों ने इस आर्ट को अपनाया और इसका विकास किया पर  भारतीयों ने इसे भुला दिया।  ध्यान और बैलेंस इसका आधार है।

मुय थाई- किकबॉक्सिंग

Photo by Matt Comesky

मुय थाई, थाईलैंड का राष्ट्रीय खेल है और यह दुनिया के सबसे घातक मार्शल आर्ट में भी शामिल है, कुछ लोग इसे आठ अंगों का मार्शल आर्ट भी कहते है जिसमें कोहनी, मुट्ठी घुटने और पैरों की पिंडलियां शामिल हैं। यह एक रफ-टफ मार्शल आर्ट है और थाईलैंड में पुराने जमाने में राजा के सभी सिपहसालार यह कला सीखते थे और इसे दुनिया की सबसे ज्यादा घातक और तुरंत जान लेने वाली मार्शल आर्ट भी कहते हैं क्योंकि इसमें शरीर के सबसे मजबूत अंगों का वार सबसे नाजुक अंगों पर किया जाता है।

करव मागा (KRAV MAGA) मार्शल आर्ट

करव मागा दुनिया के सबसे बेहतरीन और श्रेष्ठ सेल्फ डिफेंस टेक्निक में से एक है और इसका अविष्कार लमी लीचटेनफील्ड ने किया था जो दुनिया के बेहतरीन रेसलर, बॉक्सर और जिमनास्ट थे। लमी ने अपने परिवार और मित्रों को सुरक्षित रखने के लिए एक यहूदियों का ग्रुप बनाया और यहीं से जन्म हुआ करव मागा का जो बना ही गलियों, सड़कों की लड़ाई के लिए था और जिसकी वजह से यहूदी अपने विरोधियों से हमेशा ही एक कदम आगे रहे हैं। करवा मागा इजराइल का राष्ट्रीय मार्शल आर्ट है और इसे अब इजराइली सेना और पुलिस भी इस्तेमाल करती है

कलारिपयाट्टू मार्शल आर्ट

कलारी को वर्ल्ड की सर्वश्रेष्ठ दस मार्शल कलाओं में इसलिए रखा गया है क्योंकि यह सभी मार्शल आर्ट की जनक है। भारत में यह विद्या पहले से ही मौजूद थी। भारत से चीन और चीन से ही यह विद्या पहुंची। कलारी का अर्थ होता है युद्ध का मैदान और इसलिए इस मार्शल आर्ट के बारे में यह कहा जाता है कि यह किसी भी स्थिति में खेल नहीं है और न सिर्फ आत्मरक्षा की विधि है अपितु यह तो एक गंभीर युद्ध कला है। इस कला में पारंगत व्यक्ति शरीर के 108 मर्म स्थानों पर प्रहार कर व्यक्ति को पंगु बना सकता है। भारत की यह प्राचीन विद्या केरल तक सिमटकर रह गई है और इसके लुप्त होने का खतरा हो गया है।

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